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Haridwar News: हरिद्वार में बासमती चावल उत्पादन के लिए बनेंगे क्लस्टर
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Thu, 23 Apr 2026 06:43 PM IST
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- मुख्य विकास अधिकारी ने तैयार की धान उत्पान को लेकर योजना
- पहले चरण में कुल 100 किसानों का जिले में किया जाएगा चयन
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। जिले में बासमती चावल की क्लस्टर आधारित खेती करने की कवायद शुरू की जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के निर्देशन में बासमती धान उत्पादन के लिए योजना तैयार की जा रही है। इसमें पहले चरण में 100 एकड़ क्षेत्रफल में बासमती धान उगाने के लिए कृषि विभाग से जुड़े 100 किसानों का चयन किया गया है।
जिले के आकांक्षी ब्लॉक बहादराबाद के अलावा भगवानपुर में 50-50 एकड़ के दो क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टरों में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की महिला लाभार्थी, कृषि विभाग से जुड़े किसान और गुर्जर समुदाय के लोग शामिल किए गए हैं। बासमती चावल को खेत से थाली तक के सिद्धांत पर पूरी मूल्य श्रृंखला के तहत विकसित किया जाएगा। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में समन्वय बैठक भी की गई। बैठक में में जनपद के प्रगतिशील किसानों, कृषि विभाग और रीप परियोजना स्टाफ ने भाग लिया। देहरादून कृषि विभाग के बासमती धान वैज्ञानिक विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हुए। वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने प्रतिभागियों को बासमती चावल की खेती, उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पूर्व और वर्तमान में बासमती धान की खेती कर रहे किसानों के अनुभव भी साझा किए। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी किसानों को इस कार्य को शुरू से अंत तक ले जाने और आने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए।
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मिशन मोड पर विकास और निर्यात की योजना
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि बासमती चावल को मिशन मोड पर विकसित किया जाएगा। इस गतिविधि में जिले के कई युवा भी शामिल होने को तैयार हैं। पारंपरिक बासमती धान प्रजातियों के उत्पादन, संरक्षण, ब्रांडिंग के अलावा पैकेजिंग के साथ निर्यात की भी कार्ययोजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य इस कार्य से जुड़े प्रत्येक हितधारक को लाभ पहुंचाना और किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाना है।
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क्लस्टर चयन और परियोजना का लक्ष्य
जिला परियोजना प्रबंधक संजय कुमार सक्सेना ने कार्यशाला की रूपरेखा, उद्देश्य और इसकी निर्यात क्षमता पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बासमती चावल के क्लस्टर चयन का कार्य परियोजना के लाभार्थियों, स्वयं सहायता समूहों और सहकारिता के सदस्यों का चयन करके किया जाएगा। रीप परियोजना लाभार्थियों को आजीविका में सहयोग प्रदान कर रही है। परियोजना का लक्ष्य हरिद्वार जिले में बासमती चावल को विशेष चावल मूल्य श्रृंखला में एक बड़ा बदलाव लाने वाले के रूप में स्थापित करना है।
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- पहले चरण में कुल 100 किसानों का जिले में किया जाएगा चयन
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। जिले में बासमती चावल की क्लस्टर आधारित खेती करने की कवायद शुरू की जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के निर्देशन में बासमती धान उत्पादन के लिए योजना तैयार की जा रही है। इसमें पहले चरण में 100 एकड़ क्षेत्रफल में बासमती धान उगाने के लिए कृषि विभाग से जुड़े 100 किसानों का चयन किया गया है।
जिले के आकांक्षी ब्लॉक बहादराबाद के अलावा भगवानपुर में 50-50 एकड़ के दो क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टरों में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की महिला लाभार्थी, कृषि विभाग से जुड़े किसान और गुर्जर समुदाय के लोग शामिल किए गए हैं। बासमती चावल को खेत से थाली तक के सिद्धांत पर पूरी मूल्य श्रृंखला के तहत विकसित किया जाएगा। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में समन्वय बैठक भी की गई। बैठक में में जनपद के प्रगतिशील किसानों, कृषि विभाग और रीप परियोजना स्टाफ ने भाग लिया। देहरादून कृषि विभाग के बासमती धान वैज्ञानिक विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हुए। वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने प्रतिभागियों को बासमती चावल की खेती, उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पूर्व और वर्तमान में बासमती धान की खेती कर रहे किसानों के अनुभव भी साझा किए। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी किसानों को इस कार्य को शुरू से अंत तक ले जाने और आने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए।
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मिशन मोड पर विकास और निर्यात की योजना
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि बासमती चावल को मिशन मोड पर विकसित किया जाएगा। इस गतिविधि में जिले के कई युवा भी शामिल होने को तैयार हैं। पारंपरिक बासमती धान प्रजातियों के उत्पादन, संरक्षण, ब्रांडिंग के अलावा पैकेजिंग के साथ निर्यात की भी कार्ययोजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य इस कार्य से जुड़े प्रत्येक हितधारक को लाभ पहुंचाना और किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाना है।
क्लस्टर चयन और परियोजना का लक्ष्य
जिला परियोजना प्रबंधक संजय कुमार सक्सेना ने कार्यशाला की रूपरेखा, उद्देश्य और इसकी निर्यात क्षमता पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बासमती चावल के क्लस्टर चयन का कार्य परियोजना के लाभार्थियों, स्वयं सहायता समूहों और सहकारिता के सदस्यों का चयन करके किया जाएगा। रीप परियोजना लाभार्थियों को आजीविका में सहयोग प्रदान कर रही है। परियोजना का लक्ष्य हरिद्वार जिले में बासमती चावल को विशेष चावल मूल्य श्रृंखला में एक बड़ा बदलाव लाने वाले के रूप में स्थापित करना है।

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