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Haridwar News: बैंक की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त, मुआवजे के आदेश
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रोशनाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, हरिद्वार ने बैंक की लापरवाही के एक मामले में पीएनबी की रोशनाबाद शाखा को दोषी ठहराया है। आयोग ने बैंक को ग्राहक की गुम हुई मूल रजिस्ट्री के स्थान पर रजिस्ट्रार कार्यालय से प्रमाणित प्रति प्राप्त कर उपलब्ध कराने के साथ मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय की राशि देने के आदेश दिए हैं।
जगजीतपुर कनखल निवासी दिनेश कुमार ने अधिवक्ता के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मुख्य प्रबंधक क्षेत्रीय निरीक्षण कार्यालय पीएनबी सेंटर-4, भेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि उन्होंने बैंक की रोशनाबाद शाखा से वर्ष 2003 में मकान निर्माण के लिए 1.25 लाख रुपये का लोन लिया था। इसके एवज में पत्नी के नाम दर्ज प्लॉट की मूल रजिस्ट्री बैंक में बंधक रखी गई थी। इसके बाद उन्होंने समय-समय पर बैंक से ऋण सुविधाएं लीं और उनका भुगतान भी किया। बैंक ने उन्हें पांच लाख रुपये की ओडी (ओवरड्राफ्ट) लिमिट भी स्वीकृत की थी। वर्ष 2022 में दिनेश कुमार ने ओडी लिमिट के नवीनीकरण के लिए बैंक में आवेदन किया।
इस दौरान बैंक अधिकारियों ने बताया कि उनकी मूल रजिस्ट्री बैंक से गुम हो गई है। इसके बाद बैंक ने औपचारिकताएं पूरी न होने का हवाला देते हुए ओडी लिमिट का नवीनीकरण करने से इन्कार कर दिया। इससे परेशान होकर उन्होंने आयोग की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरेश रावत और रंजना गोयल की पीठ ने पीएनबी रोशनाबाद शाखा को 45 दिन के भीतर अपने खर्च पर रजिस्ट्रार कार्यालय से मूल विक्रय पत्र की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर ग्राहक को सौंपने और इसका प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 15 हजार और वाद व्यय के पांच हजार रुपये देने को कहा। आदेश का पालन न होने पर आठ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
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जगजीतपुर कनखल निवासी दिनेश कुमार ने अधिवक्ता के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मुख्य प्रबंधक क्षेत्रीय निरीक्षण कार्यालय पीएनबी सेंटर-4, भेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि उन्होंने बैंक की रोशनाबाद शाखा से वर्ष 2003 में मकान निर्माण के लिए 1.25 लाख रुपये का लोन लिया था। इसके एवज में पत्नी के नाम दर्ज प्लॉट की मूल रजिस्ट्री बैंक में बंधक रखी गई थी। इसके बाद उन्होंने समय-समय पर बैंक से ऋण सुविधाएं लीं और उनका भुगतान भी किया। बैंक ने उन्हें पांच लाख रुपये की ओडी (ओवरड्राफ्ट) लिमिट भी स्वीकृत की थी। वर्ष 2022 में दिनेश कुमार ने ओडी लिमिट के नवीनीकरण के लिए बैंक में आवेदन किया।
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इस दौरान बैंक अधिकारियों ने बताया कि उनकी मूल रजिस्ट्री बैंक से गुम हो गई है। इसके बाद बैंक ने औपचारिकताएं पूरी न होने का हवाला देते हुए ओडी लिमिट का नवीनीकरण करने से इन्कार कर दिया। इससे परेशान होकर उन्होंने आयोग की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरेश रावत और रंजना गोयल की पीठ ने पीएनबी रोशनाबाद शाखा को 45 दिन के भीतर अपने खर्च पर रजिस्ट्रार कार्यालय से मूल विक्रय पत्र की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर ग्राहक को सौंपने और इसका प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 15 हजार और वाद व्यय के पांच हजार रुपये देने को कहा। आदेश का पालन न होने पर आठ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
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