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Haridwar News: धनौरी को नगर पंचायत बनाने की मांग तेज, विकास ने बदली क्षेत्र की तस्वीर
Sun, 26 Jul 2026 07:23 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sun, 26 Jul 2026 07:23 PM IST
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विकास की नई उड़ान, बढ़ती जरूरतों और समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने जताई उम्मीद
- शिक्षा, व्यापार और आधारभूत ढांचे के विस्तार से उभरा नया शहरी केंद्र
- नागरिक सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन की उठी
डॉ. हर्ष सैनी
धनौरी। धनौरी क्षेत्र ने विकास के नए आयाम छूए हैं। शिक्षा, व्यापार और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार ने इस कस्बे को ग्रामीण स्वरूप से निकालकर एक उभरते शहर का रूप दे दिया है। ऐसे में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि धनौरी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए ताकि विकास योजनाएं और नागरिक सुविधाएं व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ सकें।
कभी घाड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का बिक्री केंद्र रही धनौरी ,आज शिक्षा और व्यवसाय का केंद्र बन चुकी है। यहां सरकारी दो डिग्री कॉलेज, लॉ कॉलेज, सरकारी तीन इंटर कॉलेज, पॉलिटेक्निक, कृषि विज्ञान केंद्र, चकबंदी कार्यालय, शिक्षण संस्थान, नई कॉलोनियां और विवाह मंडप तेजी से बढ़ते शहरीकरण की तस्वीर पेश कर रहे हैं। सिडकुल की स्थापना के बाद आसपास की कंपनियों ने भी यहां रोजगार और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ाया है।
अटैच बॉक्स - 1
समस्याएं भी बढ़ीं, अब चाहिए नियोजित व्यवस्था
विकास के साथ धनौरी में यातायात जाम, जल निकासी, कूड़ा निस्तारण और सड़क रखरखाव जैसी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। बढ़ती आबादी और बाजार विस्तार के चलते अब ग्राम पंचायत की सीमित व्यवस्था इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं रही। यही कारण है कि ग्रामीण और व्यापारी वर्ग नगर पंचायत गठन को आज की जरूरत बता रहे हैं।
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अटैच बॉक्स - 2
चार गांवों को जोड़कर बने नगर पंचायत
स्थानीय प्रस्ताव के अनुसार, धनौरी के साथ धनोरा, जसवावाला, तेलीवाला और कोटा मुरादनगर ग्राम पंचायतों को मिलाकर नगर पंचायत का स्वरूप दिया जा सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही हरिद्वार—भगवानपुर मार्ग पर स्थित है, जिससे इसका रणनीतिक और व्यावसायिक महत्व और बढ़ जाता है।
अटैच बॉक्स - 3
ग्रामीणों को मिलेंगे ये फायदे
नगर पंचायत बनने से क्षेत्र में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, पार्क, सीवर लाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं में बड़ा सुधार आएगा। साथ ही क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुंचेगा और विकास कार्यों के लिए अलग बजट मिलने से पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।
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- शिक्षा, व्यापार और आधारभूत ढांचे के विस्तार से उभरा नया शहरी केंद्र
- नागरिक सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन की उठी
डॉ. हर्ष सैनी
धनौरी। धनौरी क्षेत्र ने विकास के नए आयाम छूए हैं। शिक्षा, व्यापार और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार ने इस कस्बे को ग्रामीण स्वरूप से निकालकर एक उभरते शहर का रूप दे दिया है। ऐसे में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि धनौरी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए ताकि विकास योजनाएं और नागरिक सुविधाएं व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ सकें।
कभी घाड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का बिक्री केंद्र रही धनौरी ,आज शिक्षा और व्यवसाय का केंद्र बन चुकी है। यहां सरकारी दो डिग्री कॉलेज, लॉ कॉलेज, सरकारी तीन इंटर कॉलेज, पॉलिटेक्निक, कृषि विज्ञान केंद्र, चकबंदी कार्यालय, शिक्षण संस्थान, नई कॉलोनियां और विवाह मंडप तेजी से बढ़ते शहरीकरण की तस्वीर पेश कर रहे हैं। सिडकुल की स्थापना के बाद आसपास की कंपनियों ने भी यहां रोजगार और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ाया है।
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समस्याएं भी बढ़ीं, अब चाहिए नियोजित व्यवस्था
विकास के साथ धनौरी में यातायात जाम, जल निकासी, कूड़ा निस्तारण और सड़क रखरखाव जैसी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। बढ़ती आबादी और बाजार विस्तार के चलते अब ग्राम पंचायत की सीमित व्यवस्था इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं रही। यही कारण है कि ग्रामीण और व्यापारी वर्ग नगर पंचायत गठन को आज की जरूरत बता रहे हैं।
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चार गांवों को जोड़कर बने नगर पंचायत
स्थानीय प्रस्ताव के अनुसार, धनौरी के साथ धनोरा, जसवावाला, तेलीवाला और कोटा मुरादनगर ग्राम पंचायतों को मिलाकर नगर पंचायत का स्वरूप दिया जा सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही हरिद्वार—भगवानपुर मार्ग पर स्थित है, जिससे इसका रणनीतिक और व्यावसायिक महत्व और बढ़ जाता है।
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ग्रामीणों को मिलेंगे ये फायदे
नगर पंचायत बनने से क्षेत्र में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, पार्क, सीवर लाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं में बड़ा सुधार आएगा। साथ ही क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुंचेगा और विकास कार्यों के लिए अलग बजट मिलने से पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।