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Haridwar News: कृषि भूमि हड़पने के आरोप में दो भाइयों पर प्राथमिकी दर्ज
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हरिद्वार। सिडकुल थाना क्षेत्र में दो सगे भाइयों ने जमीन हड़पने की साजिश रच डाली। आरोप है कि अब उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, शिवालिक नगर निवासी प्रेम शंकर गुप्ता ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने सलेमपुर महदूद निवासी इमरत सिंह की कृषि भूमि खरीदने का सौदा किया था। इमरत अनुसूचित जाति से होने के कारण भूमि सीधे उनके नाम नहीं हो सकती थी। आरोप है कि इमरत ने अपने परिचित रतिराम के नाम पर भूमि की रजिस्ट्री कराने का सुझाव दिया और सरकारी अनुमति मिलने पर जमीन उनके नाम कराने का भरोसा दिलाया। सात दिसंबर 2012 को भूमि रतिराम के नाम रजिस्टर्ड कराई। भूमि खरीद के लिए 20 लाख रुपये का भुगतान उन्होंने बैंक चेक के माध्यम से किया, जबकि रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क का खर्च भी उन्होंने ही उठाया।
आरोप है कि रतिराम ने म्यूटेशन और अनुमति की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर दो लाख रुपये नकद भी लिए। रतिराम ने बाद में उनकी जानकारी के बिना वर्ष 2013 में जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी थी। विरोध के बाद जमीन फिर रतिराम के नाम वापस हो गई, लेकिन उसने हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की। बाद में उसकी मृत्यु हो गई और भूमि उसके पुत्र विजेंद्र कुमार और रविंद्र कुमार के नाम दर्ज हो गई। आरोप है कि दोनों भाइयों ने कई बार कहने के बावजूद भूमि वापस नहीं की और अब उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। थाना प्रभारी अजय शाह ने बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच की जा रही है।
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पुलिस के अनुसार, शिवालिक नगर निवासी प्रेम शंकर गुप्ता ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने सलेमपुर महदूद निवासी इमरत सिंह की कृषि भूमि खरीदने का सौदा किया था। इमरत अनुसूचित जाति से होने के कारण भूमि सीधे उनके नाम नहीं हो सकती थी। आरोप है कि इमरत ने अपने परिचित रतिराम के नाम पर भूमि की रजिस्ट्री कराने का सुझाव दिया और सरकारी अनुमति मिलने पर जमीन उनके नाम कराने का भरोसा दिलाया। सात दिसंबर 2012 को भूमि रतिराम के नाम रजिस्टर्ड कराई। भूमि खरीद के लिए 20 लाख रुपये का भुगतान उन्होंने बैंक चेक के माध्यम से किया, जबकि रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क का खर्च भी उन्होंने ही उठाया।
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आरोप है कि रतिराम ने म्यूटेशन और अनुमति की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर दो लाख रुपये नकद भी लिए। रतिराम ने बाद में उनकी जानकारी के बिना वर्ष 2013 में जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी थी। विरोध के बाद जमीन फिर रतिराम के नाम वापस हो गई, लेकिन उसने हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की। बाद में उसकी मृत्यु हो गई और भूमि उसके पुत्र विजेंद्र कुमार और रविंद्र कुमार के नाम दर्ज हो गई। आरोप है कि दोनों भाइयों ने कई बार कहने के बावजूद भूमि वापस नहीं की और अब उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। थाना प्रभारी अजय शाह ने बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच की जा रही है।