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Haridwar News: भीषण गर्मी से अस्पतालों में मरीजों की भीड़
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हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में बढ़ते तापमान का असर अब सड़कों के साथ-साथ अस्पतालों तक पहुंचने लगा है। भीषण गर्मी से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। जिला अस्पताल और मेला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।
इनमें सर्वाधिक डिहाइड्रेशन, बुखार, उल्टी-दस्त, चक्कर आना और हीट स्ट्रोक जैसे लक्षणों से पीड़ित इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने वाले लोगों पर गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। मेला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनीष कुमार ने विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। उन्होंने हल्के और सूती कपड़े पहनने, ताजा और सुरक्षित भोजन करने के साथ खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करने का सुझाव दिया है।
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बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता
आयुष विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह ने बाहर से आने वाले यात्रियों के बच्चों के स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बच्चे हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षणों को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए माता-पिता को बच्चों में होने वाले किसी भी बदलाव पर सतर्क रहना चाहिए। यदि बच्चों में अत्यधिक सुस्ती, बुखार या उल्टी-दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
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बचाव के उपाय
- दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी, जूस और अन्य तरल पदार्थ पीते रहें।
- शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नमक-चीनी का घोल (ओआरएस) का सेवन करें।
- हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें।
- ताजा और घर का बना भोजन करें।
- बाहर बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें।
- गर्मी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
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अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश
हरिद्वार जैसे पर्यटन स्थलों पर जहां यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों को भी गर्मी से बचाव के लिए चिकित्सकों की ओर से बताई गई सावधानियों का गंभीरता से पालन करना चाहिए ताकि वे स्वस्थ रह सकें। - मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी
इनमें सर्वाधिक डिहाइड्रेशन, बुखार, उल्टी-दस्त, चक्कर आना और हीट स्ट्रोक जैसे लक्षणों से पीड़ित इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने वाले लोगों पर गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। मेला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनीष कुमार ने विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। उन्होंने हल्के और सूती कपड़े पहनने, ताजा और सुरक्षित भोजन करने के साथ खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करने का सुझाव दिया है।
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बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता
आयुष विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह ने बाहर से आने वाले यात्रियों के बच्चों के स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बच्चे हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षणों को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए माता-पिता को बच्चों में होने वाले किसी भी बदलाव पर सतर्क रहना चाहिए। यदि बच्चों में अत्यधिक सुस्ती, बुखार या उल्टी-दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
बचाव के उपाय
- दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी, जूस और अन्य तरल पदार्थ पीते रहें।
- शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नमक-चीनी का घोल (ओआरएस) का सेवन करें।
- हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें।
- ताजा और घर का बना भोजन करें।
- बाहर बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें।
- गर्मी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश
हरिद्वार जैसे पर्यटन स्थलों पर जहां यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों को भी गर्मी से बचाव के लिए चिकित्सकों की ओर से बताई गई सावधानियों का गंभीरता से पालन करना चाहिए ताकि वे स्वस्थ रह सकें। - मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी