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Haridwar News: सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी को 1.43 लाख लौटाने का आदेश
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रोशनाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, हरिद्वार ने सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ अहम फैसला सुनाते हुए एक निवेशक को उसकी जमा धनराशि ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर 1,43,528 की राशि 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया है।
सविता पत्नी संतोष कुमार निवासी ईस्ट अंबर तालाब, साकेत कॉलोनी रुड़की ने सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के क्षेत्रीय कार्यालय (सहारा इंडिया भवन, कपूरथला परिसर, अलीगंज, लखनऊ), शाखा कार्यालय (अंबा मार्केट, द्वितीय तल, रेलवे स्टेशन सड़क, मालवीय चौक, रुड़की) एजेंट रागनी मित्तल के खिलाफ परिवाद दायर किया था। बताया कि वर्ष 2017 में एजेंट के माध्यम से उन्होंने दो आरडी खातों में 48,000-48,000 जमा किए थे। इसके अलावा वर्ष 2019 में 12,000-12,000 की दो एफडी भी करवाई थीं। परिपक्वता अवधि पूरी होने के बावजूद कंपनी ने कुल 1,43,528 की धनराशि का भुगतान नहीं किया। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने और अनुरोध करने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरेश रावत और रंजना गोयल की पीठ ने की। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि परिपक्वता राशि का भुगतान न करना सेवा में गंभीर कमी है। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया कि मामला सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत आता है, लेकिन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि उपभोक्ता आयोग को इस प्रकरण की सुनवाई का पूर्ण अधिकार है। आयोग ने कंपनी को मूल धनराशि के अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 व वाद व्यय के रूप में 5,000 अतिरिक्त भुगतान करने का भी आदेश दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा।
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सविता पत्नी संतोष कुमार निवासी ईस्ट अंबर तालाब, साकेत कॉलोनी रुड़की ने सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के क्षेत्रीय कार्यालय (सहारा इंडिया भवन, कपूरथला परिसर, अलीगंज, लखनऊ), शाखा कार्यालय (अंबा मार्केट, द्वितीय तल, रेलवे स्टेशन सड़क, मालवीय चौक, रुड़की) एजेंट रागनी मित्तल के खिलाफ परिवाद दायर किया था। बताया कि वर्ष 2017 में एजेंट के माध्यम से उन्होंने दो आरडी खातों में 48,000-48,000 जमा किए थे। इसके अलावा वर्ष 2019 में 12,000-12,000 की दो एफडी भी करवाई थीं। परिपक्वता अवधि पूरी होने के बावजूद कंपनी ने कुल 1,43,528 की धनराशि का भुगतान नहीं किया। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने और अनुरोध करने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
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मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरेश रावत और रंजना गोयल की पीठ ने की। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि परिपक्वता राशि का भुगतान न करना सेवा में गंभीर कमी है। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया कि मामला सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत आता है, लेकिन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि उपभोक्ता आयोग को इस प्रकरण की सुनवाई का पूर्ण अधिकार है। आयोग ने कंपनी को मूल धनराशि के अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 व वाद व्यय के रूप में 5,000 अतिरिक्त भुगतान करने का भी आदेश दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा।