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खेतों को बचाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग जरूरी : डॉ. पुरुषोत्तम
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Mon, 08 Jun 2026 06:54 PM IST
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खेतों को बचाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग जरूरी : डॉ. पुरुषोत्तम
धनौरी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि यदि खेतों में रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग लगातार जारी रहा तो भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होगी और फसलों का उत्पादन घटने लगेगा। विशेषज्ञों ने किसानों को हरी खाद तथा जैविक खाद के अधिकाधिक प्रयोग की सलाह दी है। कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी में आयोजित गोष्ठी में खेत बचाओ अभियान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से खेत बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को बताया जा रहा है कि वे अपनी कृषि भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक कैसे बनाए रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेती के प्रति किसानों का सकारात्मक दृष्टिकोण होना आवश्यक है। यदि खेतों में केवल रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग किया जाता रहा तो मिट्टी की गुणवत्ता खराब होगी, जिससे पैदावार और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने किसानों से हरी खाद एवं जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस अवसर पर डॉ. योगेंद्र पाल सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने किसानों को बताया कि विभिन्न फसलों की बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन के लिए जैविक खाद का उपयोग अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है तथा फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। गोष्ठी में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए लगभग 25 किसानों ने भाग लिया।
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धनौरी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि यदि खेतों में रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग लगातार जारी रहा तो भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होगी और फसलों का उत्पादन घटने लगेगा। विशेषज्ञों ने किसानों को हरी खाद तथा जैविक खाद के अधिकाधिक प्रयोग की सलाह दी है। कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी में आयोजित गोष्ठी में खेत बचाओ अभियान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से खेत बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को बताया जा रहा है कि वे अपनी कृषि भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक कैसे बनाए रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेती के प्रति किसानों का सकारात्मक दृष्टिकोण होना आवश्यक है। यदि खेतों में केवल रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग किया जाता रहा तो मिट्टी की गुणवत्ता खराब होगी, जिससे पैदावार और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने किसानों से हरी खाद एवं जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस अवसर पर डॉ. योगेंद्र पाल सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने किसानों को बताया कि विभिन्न फसलों की बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन के लिए जैविक खाद का उपयोग अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है तथा फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। गोष्ठी में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए लगभग 25 किसानों ने भाग लिया।