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Kotdwar News: मुआवजा व पुल निर्माण के लिए प्रभावितों ने की नारेबाजी
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 10 Jun 2026 05:56 PM IST
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सतलुज जल विद्युत परियोजना प्रभावितों ने दिया धरना
अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा, खेती सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य करने की मांग
पुरोला। मोरी क्षेत्र में टौंस नदी पर निर्मित 60 मेगावाट सतलुज जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने मौके पर जमकर नारेबाजी की। नैटवाड़ और गैंचवाण गांव के प्रभावित परिवार अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा, खेती सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य, चरान-चुगान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने टौंस नदी पार स्थित कृषि भूमि तक पहुंच के लिए पुल निर्माण की मांग की है। धरना स्थल पर एकत्र ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समस्या हल करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बैराज निर्माण के लिए उनकी 27 नाली कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी।
इसके अलावा परियोजना निर्माण के दौरान कंपनी ने नदी पार स्थित लगभग 200 नाली से अधिक कृषि भूमि तक पहुंच के लिए पुल निर्माण, खेती की सुरक्षा हेतु सुरक्षा दीवार बनाने तथा पशुओं के चरान-चुगान पर किसी प्रकार की रोक-टोक न लगाने का आश्वासन दिया था। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि परियोजना का निर्माण कार्य दो वर्ष पूर्व पूरा हो चुका है।
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निर्माण कंपनी द्वारा परियोजना हस्तांतरित किए जाने के बावजूद आज तक भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया है। धरना स्थल पर जलमा देवी, धर्मी देवी, चनदरी देवी, देवेंद्री देवी, सुन्दरी देवी, मीना, सुरतूमा, बिजली, सरिता देवी, सुमित्रा देवी, बटूली देवी, तारी देवी, कलापती, रोजनी देवी मौजूद रहे।
अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा, खेती सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य करने की मांग
पुरोला। मोरी क्षेत्र में टौंस नदी पर निर्मित 60 मेगावाट सतलुज जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने मौके पर जमकर नारेबाजी की। नैटवाड़ और गैंचवाण गांव के प्रभावित परिवार अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा, खेती सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य, चरान-चुगान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने टौंस नदी पार स्थित कृषि भूमि तक पहुंच के लिए पुल निर्माण की मांग की है। धरना स्थल पर एकत्र ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समस्या हल करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बैराज निर्माण के लिए उनकी 27 नाली कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी।
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इसके अलावा परियोजना निर्माण के दौरान कंपनी ने नदी पार स्थित लगभग 200 नाली से अधिक कृषि भूमि तक पहुंच के लिए पुल निर्माण, खेती की सुरक्षा हेतु सुरक्षा दीवार बनाने तथा पशुओं के चरान-चुगान पर किसी प्रकार की रोक-टोक न लगाने का आश्वासन दिया था। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि परियोजना का निर्माण कार्य दो वर्ष पूर्व पूरा हो चुका है।
निर्माण कंपनी द्वारा परियोजना हस्तांतरित किए जाने के बावजूद आज तक भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया है। धरना स्थल पर जलमा देवी, धर्मी देवी, चनदरी देवी, देवेंद्री देवी, सुन्दरी देवी, मीना, सुरतूमा, बिजली, सरिता देवी, सुमित्रा देवी, बटूली देवी, तारी देवी, कलापती, रोजनी देवी मौजूद रहे।