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Kotdwar News: कई चौराहों पर सजीं होलिका, महिलाओं ने किया पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Mon, 02 Mar 2026 07:36 PM IST
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झंडाचौक, आमपड़ाव, गाड़ीघाट चौराहा समेत कोटद्वार भाबर के सभी मुख्य चौराहों पर सजाई गई है होलिका
कोटद्वार। नगर व आसपास के क्षेत्र में सोमवार को होली पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन से पहले सुबह से ही महिलाएं परिवारों के साथ होलिका पूजन के लिए पहुंचीं।
झंडाचौक, आमपड़ाव, काशीरामपुर, गाड़ीघाट चौराहा, मानपुर समेत कोटद्वार भाबर के विभिन्न स्थानों में लकड़ियां, कंडे एकत्रित किए गए। महिलाओं ने परंपरागत ढंग से होलिका पूजन कर परिवार की खुशहाली के साथ ही संतान की दीर्घायु की कामना की। होलिका दहन स्थलों के आसपास मेले जैसा माहौल रहा। कई जगहों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता के लिए मटकियां सजाई गईं। दिन से ही चौक चौराहों पर डीजे की धुन पर लोगों का थिरकना शुरू हो गया।
ज्योतिषाचार्य एवं सिद्धबली मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित देवी प्रसाद भट्ट ने बताया कि शास्त्रों में केवल होलिका दहन का ही मुहूर्त देखा जाता है। इस बार भद्रा होने के कारण भद्रा के अग्र भाग में शाम 6 से 8 बजे तक या फिर पृच्छकाल रात्रि 1:30 बजे का मुहूर्त है। कहा कि ग्रहण का फाग पर्व मनाने व धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। होलिका दहन के अगले दिन ही फाग मनाए जाने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि होली पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
लैंसडौन। नगर के गांधी चौक में स्थापित होली स्थल पर महिलाओं ने (जेलमाना ) गोबर से बने बड़कुल्ला की जल, रोली, मोली चावल आदि से पूजा कर चढ़ाया। महिलाओं ने होली पूजन स्थल पर कच्चे सूतों की कुकड़ी, नारियल भी चढ़ाया।
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कोटद्वार। नगर व आसपास के क्षेत्र में सोमवार को होली पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन से पहले सुबह से ही महिलाएं परिवारों के साथ होलिका पूजन के लिए पहुंचीं।
झंडाचौक, आमपड़ाव, काशीरामपुर, गाड़ीघाट चौराहा, मानपुर समेत कोटद्वार भाबर के विभिन्न स्थानों में लकड़ियां, कंडे एकत्रित किए गए। महिलाओं ने परंपरागत ढंग से होलिका पूजन कर परिवार की खुशहाली के साथ ही संतान की दीर्घायु की कामना की। होलिका दहन स्थलों के आसपास मेले जैसा माहौल रहा। कई जगहों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता के लिए मटकियां सजाई गईं। दिन से ही चौक चौराहों पर डीजे की धुन पर लोगों का थिरकना शुरू हो गया।
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ज्योतिषाचार्य एवं सिद्धबली मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित देवी प्रसाद भट्ट ने बताया कि शास्त्रों में केवल होलिका दहन का ही मुहूर्त देखा जाता है। इस बार भद्रा होने के कारण भद्रा के अग्र भाग में शाम 6 से 8 बजे तक या फिर पृच्छकाल रात्रि 1:30 बजे का मुहूर्त है। कहा कि ग्रहण का फाग पर्व मनाने व धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। होलिका दहन के अगले दिन ही फाग मनाए जाने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि होली पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
लैंसडौन। नगर के गांधी चौक में स्थापित होली स्थल पर महिलाओं ने (जेलमाना ) गोबर से बने बड़कुल्ला की जल, रोली, मोली चावल आदि से पूजा कर चढ़ाया। महिलाओं ने होली पूजन स्थल पर कच्चे सूतों की कुकड़ी, नारियल भी चढ़ाया।

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