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Kotdwar News: बाजार में खूब बिक रहे गुलाल के सिलिंडर व रंग-बिरंगी टी-शर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 03 Mar 2026 05:07 PM IST
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दो से पांच किलो तक सिलिंडर उपलब्ध हैं बाजार में
कोटद्वार। नए दौर में रंगों के त्योहार होली को मनाने का अंदाज भी बदल गया है। अब गुलाल भी सिलिंडर में मिल रहा है। रंग खेलने के लिए भी बाजार में रंग-बिरंगी सुंदर टी-शर्ट की लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं।
पांच किलोग्राम का सिलिंडर एक हजार रुपये और इससे छोटे यानि दो व तीन किलोग्राम के सिलिंडर अलग-अलग दाम पर बिके। वहीं, बदलते जमाने के साथ बदलती सोच का असर बाजार में नजर आया। आमतौर पर फटे-पुराने कपड़े पहनकर रंग खेलने की सोच बदल रही है। बाजार में 100 रुपये में बिक रही सफेद टी-शर्ट लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
सिंथेटिक रंगों की जमकर हुई बिक्री
कैमिकलयुक्त रंगों से परहेज करने की अपील, आह्वान और संकल्प सब कुछ धरे ही रह गए। बाजार में प्राकृतिक रंगों की अपेक्षा सिंथेटिक रंगों की जमकर बिक्री हुई। सबसे कम वजन की मात्र 20 ग्राम की सिंथेटिक रंग की डिब्बी 40 रुपये में बिकी। सिंथेटिक रंगों के ब्रांड, वजन और क्वालिटी के हिसाब से दाम रहे। रंगीन झाग के स्प्रे, सिल्वर और ब्लैक स्प्रे की भी बिक्री हुई।
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मानें चिकित्सीय सलाह, रहें सचेत
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. जेसी ध्यानी कहते हैं कि हर किसी को बड़ी सहजता से रंग लगाएं। प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें। सिंथेटिक रंग जबरन लगाने से यह कई बार आंख, नाक व मुंह में पहुंचकर बड़ा नुकसान कर सकता है।
- सिलेंडर में भरा गुलाल कुछ फासले से उड़ाएं।
- जितना संभव हो सके सिंथेटिक रंगों से बचें।
- अपने शरीर और बालों को ढककर रखें।
- बाजार में उपलब्ध फेस कवर लगाएं।
- कोई समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से मिलें।
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- सिंथेटिक रंगों की रोकथाम पर नहीं उठा कोई कदम
इस पर पुलिस सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं करती है। जांच के लिए पहुंचने वाली टीम को पुलिस बल मुहैया कराया जा सकता है। -निहारिका सेमवाल, सीओ कोटद्वार।
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सिंथेटिक रंगों की रोकथाम के लिए औषधि प्रशासन स्तर से कोई चेकिंग अथवा कार्रवाई नहीं की जाती है। -सीमा बिष्ट चौहान, खाद्य एवं औषधि प्रशासन पौड़ी।
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कोटद्वार। नए दौर में रंगों के त्योहार होली को मनाने का अंदाज भी बदल गया है। अब गुलाल भी सिलिंडर में मिल रहा है। रंग खेलने के लिए भी बाजार में रंग-बिरंगी सुंदर टी-शर्ट की लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं।
पांच किलोग्राम का सिलिंडर एक हजार रुपये और इससे छोटे यानि दो व तीन किलोग्राम के सिलिंडर अलग-अलग दाम पर बिके। वहीं, बदलते जमाने के साथ बदलती सोच का असर बाजार में नजर आया। आमतौर पर फटे-पुराने कपड़े पहनकर रंग खेलने की सोच बदल रही है। बाजार में 100 रुपये में बिक रही सफेद टी-शर्ट लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
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सिंथेटिक रंगों की जमकर हुई बिक्री
कैमिकलयुक्त रंगों से परहेज करने की अपील, आह्वान और संकल्प सब कुछ धरे ही रह गए। बाजार में प्राकृतिक रंगों की अपेक्षा सिंथेटिक रंगों की जमकर बिक्री हुई। सबसे कम वजन की मात्र 20 ग्राम की सिंथेटिक रंग की डिब्बी 40 रुपये में बिकी। सिंथेटिक रंगों के ब्रांड, वजन और क्वालिटी के हिसाब से दाम रहे। रंगीन झाग के स्प्रे, सिल्वर और ब्लैक स्प्रे की भी बिक्री हुई।
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मानें चिकित्सीय सलाह, रहें सचेत
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. जेसी ध्यानी कहते हैं कि हर किसी को बड़ी सहजता से रंग लगाएं। प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें। सिंथेटिक रंग जबरन लगाने से यह कई बार आंख, नाक व मुंह में पहुंचकर बड़ा नुकसान कर सकता है।
- सिलेंडर में भरा गुलाल कुछ फासले से उड़ाएं।
- जितना संभव हो सके सिंथेटिक रंगों से बचें।
- अपने शरीर और बालों को ढककर रखें।
- बाजार में उपलब्ध फेस कवर लगाएं।
- कोई समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से मिलें।
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- सिंथेटिक रंगों की रोकथाम पर नहीं उठा कोई कदम
इस पर पुलिस सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं करती है। जांच के लिए पहुंचने वाली टीम को पुलिस बल मुहैया कराया जा सकता है। -निहारिका सेमवाल, सीओ कोटद्वार।
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सिंथेटिक रंगों की रोकथाम के लिए औषधि प्रशासन स्तर से कोई चेकिंग अथवा कार्रवाई नहीं की जाती है। -सीमा बिष्ट चौहान, खाद्य एवं औषधि प्रशासन पौड़ी।

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