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Kotdwar News: समेश्वर महाराज के सावन मेले में कफूवा नृत्य ने बांधा समां
Mon, 20 Jul 2026 05:25 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Mon, 20 Jul 2026 05:25 PM IST
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पुरोला। मोरी विकासखंड के जखोल स्थित समेश्वर महाराज के मूल थाती मंदिर में रविवार को आयोजित मेले में श्रद्धा, आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पंचगाई, बड़ासु और अडोर पट्टी के 22 गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे और भगवान समेश्वर महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण पारंपरिक कफूवा नृत्य रहा। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का दिल जीत लिया। मेले में लिवाड़ी, फिताड़ी, रेक्चा, सांवणी, सटूड़ी, धारा, पांव, सुनकुंडी, सांकरी, कोटगांव, तालुका, ओसला, गगाड़, ढाटमीर, पंवाणी सहित 22 गांवों के श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। जखोल को इन गांवों की मूल थाती माना जाता है जिससे इस मेले का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
आषाढ़ माह से शुरू होकर सावण मास के अंत तक चलने वाले इस पारंपरिक आयोजन के दौरान समेश्वर महाराज की देवडोली के सानिध्य में सभी 22 गांवों में क्रमवार मेले आयोजित किए जाते हैं। संवाद
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मेले का सबसे बड़ा आकर्षण पारंपरिक कफूवा नृत्य रहा। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का दिल जीत लिया। मेले में लिवाड़ी, फिताड़ी, रेक्चा, सांवणी, सटूड़ी, धारा, पांव, सुनकुंडी, सांकरी, कोटगांव, तालुका, ओसला, गगाड़, ढाटमीर, पंवाणी सहित 22 गांवों के श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। जखोल को इन गांवों की मूल थाती माना जाता है जिससे इस मेले का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
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आषाढ़ माह से शुरू होकर सावण मास के अंत तक चलने वाले इस पारंपरिक आयोजन के दौरान समेश्वर महाराज की देवडोली के सानिध्य में सभी 22 गांवों में क्रमवार मेले आयोजित किए जाते हैं। संवाद
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