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Kotdwar News: नेत्र विशेषज्ञ की ओपीडी पर लटका ताला, भटकते रहे मरीज
Mon, 20 Jul 2026 05:54 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Mon, 20 Jul 2026 05:54 PM IST
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एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में लगी रही लाइन
कोटद्वार। आखिरकार सोमवार को नेत्र विशेषज्ञ की ओपीडी पर दिनभर ताला लटका रहा। वहीं, एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ होने से लोगों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ी। अस्पताल प्रशासन ने सीएमओ को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है।
बेस अस्पताल में अब तक एकमात्र नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार सिंह तैनात थे। उनका पौड़ी स्थानांतरण होने और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र कुमार के रिलीव होने से सोमवार को दोनों की ओपीडी नहीं खुली और मरीज भटकते रहे। बच्चों को लेकर आए परिजन एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. कुसुमा रावत की ओपीडी के बाहर लंबी प्रतीक्षा में खड़े रहे।
वहीं अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक ने सीएमओ को पत्र भेजकर नेत्र विशेषज्ञ के स्थानांतरण से उत्पन्न समस्या से अवगत कराया है। बताया कि जिला चिकित्सालय में नेत्र सर्जन का एक पद है। वहां पहले से ही दो चिकित्साधिकारी कार्यरत हैं। वहीं, बेस अस्पताल में नेत्र सर्जन के दो पदों के सापेक्ष डॉ. दिनेश कुमार सिंह एकमात्र सर्जन कार्यरत हैं। विशेषज्ञ के रूप में जिनकी तैनाती फरवरी 2026 में की गई है, उनकी विशेषज्ञता का पंजीकरण उपलब्ध नहीं होने से उनकी सेवाएं नहीं ली जा सकती हैं।
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प्रमुख अधीक्षक ने कहा कि डॉ. दिनेश द्वारा वर्ष 2025-26 में ओपीडी में 15 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया। राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में मोतियाबिंद के 190 मरीजों के ऑपरेशन किए गए।
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कोटद्वार। आखिरकार सोमवार को नेत्र विशेषज्ञ की ओपीडी पर दिनभर ताला लटका रहा। वहीं, एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ होने से लोगों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ी। अस्पताल प्रशासन ने सीएमओ को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है।
बेस अस्पताल में अब तक एकमात्र नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार सिंह तैनात थे। उनका पौड़ी स्थानांतरण होने और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र कुमार के रिलीव होने से सोमवार को दोनों की ओपीडी नहीं खुली और मरीज भटकते रहे। बच्चों को लेकर आए परिजन एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. कुसुमा रावत की ओपीडी के बाहर लंबी प्रतीक्षा में खड़े रहे।
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वहीं अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक ने सीएमओ को पत्र भेजकर नेत्र विशेषज्ञ के स्थानांतरण से उत्पन्न समस्या से अवगत कराया है। बताया कि जिला चिकित्सालय में नेत्र सर्जन का एक पद है। वहां पहले से ही दो चिकित्साधिकारी कार्यरत हैं। वहीं, बेस अस्पताल में नेत्र सर्जन के दो पदों के सापेक्ष डॉ. दिनेश कुमार सिंह एकमात्र सर्जन कार्यरत हैं। विशेषज्ञ के रूप में जिनकी तैनाती फरवरी 2026 में की गई है, उनकी विशेषज्ञता का पंजीकरण उपलब्ध नहीं होने से उनकी सेवाएं नहीं ली जा सकती हैं।
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प्रमुख अधीक्षक ने कहा कि डॉ. दिनेश द्वारा वर्ष 2025-26 में ओपीडी में 15 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया। राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में मोतियाबिंद के 190 मरीजों के ऑपरेशन किए गए।