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Kotdwar News: सड़क के अभाव में वीरान हुआ जयहरीखाल का मंझोला बड़ा गांव

संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार Updated Mon, 23 Feb 2026 05:22 PM IST
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Manjhola Bada village of Jayharikhal is deserted due to lack of road.
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चार माह पहले अंतिम दो परिवारों ने भी किया गांव से पलायन
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ग्रामीण बोले-सड़क बनने पर ही करेंगे रिवर्स पलायन
दुगड्डा (कोटद्वार)। जयहरीखाल ब्लॉक के ग्रामसभा सेंधी का राजस्व ग्राम मंझोला सड़क के अभाव में वीरान हो गया है। चार माह पहले गांव के आखिरी दो परिवारों ने भी गांव से पलायन कर दिया है। गैर आबाद होने से यहां हाथियों समेत अन्य जंगली जानवरों ने अपना वासस्थल बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें सड़क सुविधा मिले तो वे रिवर्स पलायन के लिए तैयार हैं।
चार सदी पूर्व गुमखाल के निकट तिलस्या व अधारियाखाल के निकट इगर गांव से शेर सिंह रावत के पूर्वजों ने मंझोला बड़ा गांव में बसागत की थी। पूर्व में गांव के लोग असिंचित भूमि पर जहां गेहूं, धान, मंडुवा, झंगोरा, दलहन, तिलहन की खेती करते थे वहीं, सिंचित क्षेत्र में धान की रोपाई भी की जाती थी।
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दुगड्डा-धुमाकोट स्टेट हाईवे से करीब 300 मीटर के फासले पर ग्रामीणों की नापखेत भूमि शुरू हो जाती है जबकि गांव मुख्य सड़क से करीब ढाई किमी की दूरी पर बसा है। आजादी के सात दशक बाद भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। ग्रामीणों ने गांव की ओर से सड़क तक पैदल आवाजाही के लिए कच्चे मार्ग को सीसी बनाने का पूर्व में प्रयास किया था जिसे वन विभाग ने रोक दिया था।
सड़क के अभाव में वृद्ध, बीमार व गर्भवती महिलाओं को सड़क तक पहुंचना चुनौती बना था जिससे गांव में पलायन दौर शुरू हो गया और अधिकांश ग्रामीण कोटद्वार, देहरादून, सेंधीखाल में जाकर बस गए। आबादी कम होने के कारण गांव में जंगली जानवरों की धमक बढ़ने लगी जिससे गांव में रह रहे परिवारों को भी पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव में 16 परिवार निवास करते थे लेकिन गांव खाली हो गया है।
ग्रामीण पंचम सिंह रावत, पूर्व प्रधान भगत सिंह रावत, प्रफुल्ल सिंह रावत का कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में उन्हें पलायन को मजबूर होना पड़ा। यदि गांव सड़क सुविधा से जुड़े तो सभी ग्रामीण रिवर्स पलायन के लिए तैयार हैं।

ग्रामीण रिवर्स पलायन के लिए तैयार हैं और यदि वन विभाग सड़क निर्माण की एनओसी दे तो गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा। विधानसभा में भातखाल- बांसी, सीरोंबाड़ी-अमलेसा मोटर मार्ग समेत कई ऐसे गांव हैं जहां गांव से मुख्य मार्ग तक के लिए संपर्क मार्ग बन चुके हैं। कई जगह वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण मुख्य संपर्क मार्ग मुख्य मार्गों से नहीं जुड़ पाए हैं।
- दिलीप रावत, विधायक लैंसडौन विधानसभा।
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