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Kotdwar News: पुलिस ने अंतरराज्यीय चोर गिरोह का किया पर्दाफाश, चार गिरफ्तार
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कोटद्वार। कोतवाली पुलिस ने बंद मकानों में चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य पहले शहर में चोरी की मोटरसाइकिल से बंद मकानों की रेकी करते थे और मौका मिलते ही लाखों रुपये के जेवरात व नकदी पर हाथ साफ कर देते थे। पुलिस ने आरोपियों से चोरी की रकम में से 13,600 रुपये नकद, दो चोरी की अपाचे मोटरसाइकिल और वारदात में प्रयुक्त एक कार बरामद की है। गिरोह का एक अन्य सदस्य अभी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।
एसएसपी सर्वेश पंवार ने बताया कि दो जुलाई को गाड़ीघाट विकासनगर निवासी उमेश चंद बमोला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वे जून में परिवार सहित पैतृक गांव गए थे। इस दौरान उनके बंद घर से नकदी और सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए। शिकायत के आधार पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
एएसपी मनोज कुमार ठाकुर, सीओ अस्मिता ममगाईं और प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीमों ने करीब 120 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों, सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने सोमवार को चार आरोपियों को खूनीबड़ क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहित निवासी गाजियाबाद, कासिफ उर्फ नन्हे, आसिफ उर्फ अमन और आमिर निवासी बरेली के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने कोटद्वार में चोरी की वारदात स्वीकार की। बताया कि चोरी किए गए आभूषण 15 हजार रुपये में बेच दिए थे। पुलिस ने चोरी की रकम में से 13,600 रुपये बरामद कर लिए हैं। जांच में यह बात भी सामने आई कि आरोपियों ने 26 जून को उधम सिंह नगर के किच्छा क्षेत्र से एक अपाचे मोटरसाइकिल चोरी की थी। इसी बाइक का इस्तेमाल कर उन्होंने कोटद्वार में बंद मकान की रेकी की और वारदात को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने आरोपियों के कब्जे से देहरादून के प्रेमनगर व डोईवाला क्षेत्र से चोरी की दो बाइकें व घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद की है।
गिरोह का मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ निवासी दिल्ली अभी फरार चल रहा है, उसकी तलाश जारी है। मामले के सफल खुलासे पर एसएसपी ने पुलिस टीम को पांच हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी ने बताया कि गिरोह के सदस्य पहले कार से शहर में पहुंचते थे और स्थानीय स्तर पर मोटरसाइकिल चोरी कर लेते थे। चोरी की बाइक से कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में घूमकर बंद मकानों की पहचान की जाती थी। वारदात के बाद बाइक को कई बार मौके के आसपास ही छोड़ दिया जाता था, ताकि पुलिस भ्रमित हो जाए। चोरी का सामान तुरंत सहयोगियों के माध्यम से दूसरी गाड़ी में स्थानांतरित कर आरोपी अलग-अलग रास्तों से निकल जाते थे, जिससे पुलिस की निगरानी और चेकिंग से बचा जा सके।
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एसएसपी सर्वेश पंवार ने बताया कि दो जुलाई को गाड़ीघाट विकासनगर निवासी उमेश चंद बमोला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वे जून में परिवार सहित पैतृक गांव गए थे। इस दौरान उनके बंद घर से नकदी और सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए। शिकायत के आधार पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
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एएसपी मनोज कुमार ठाकुर, सीओ अस्मिता ममगाईं और प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीमों ने करीब 120 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों, सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने सोमवार को चार आरोपियों को खूनीबड़ क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहित निवासी गाजियाबाद, कासिफ उर्फ नन्हे, आसिफ उर्फ अमन और आमिर निवासी बरेली के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने कोटद्वार में चोरी की वारदात स्वीकार की। बताया कि चोरी किए गए आभूषण 15 हजार रुपये में बेच दिए थे। पुलिस ने चोरी की रकम में से 13,600 रुपये बरामद कर लिए हैं। जांच में यह बात भी सामने आई कि आरोपियों ने 26 जून को उधम सिंह नगर के किच्छा क्षेत्र से एक अपाचे मोटरसाइकिल चोरी की थी। इसी बाइक का इस्तेमाल कर उन्होंने कोटद्वार में बंद मकान की रेकी की और वारदात को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने आरोपियों के कब्जे से देहरादून के प्रेमनगर व डोईवाला क्षेत्र से चोरी की दो बाइकें व घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद की है।
गिरोह का मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ निवासी दिल्ली अभी फरार चल रहा है, उसकी तलाश जारी है। मामले के सफल खुलासे पर एसएसपी ने पुलिस टीम को पांच हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी ने बताया कि गिरोह के सदस्य पहले कार से शहर में पहुंचते थे और स्थानीय स्तर पर मोटरसाइकिल चोरी कर लेते थे। चोरी की बाइक से कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में घूमकर बंद मकानों की पहचान की जाती थी। वारदात के बाद बाइक को कई बार मौके के आसपास ही छोड़ दिया जाता था, ताकि पुलिस भ्रमित हो जाए। चोरी का सामान तुरंत सहयोगियों के माध्यम से दूसरी गाड़ी में स्थानांतरित कर आरोपी अलग-अलग रास्तों से निकल जाते थे, जिससे पुलिस की निगरानी और चेकिंग से बचा जा सके।