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Kotdwar News: नारों में ही जगाई जा रही शिक्षा की अलख
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 24 Jan 2026 05:29 PM IST
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एक-एक कर शिफ्ट होते चले गए शिक्षण संस्थान
बच्चों के भविष्य के लिए पलायन को मजबूर हुए लोग
जयहरीखाल। एक समय गढ़वाल अंचल में शिक्षा का मजबूत केंद्र रहा जयहरीखाल आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों के अन्यत्र शिफ्ट होने से ऐतिहासिक कस्बे की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
जयहरीखाल में संचालित बीटीसी प्रशिक्षण संस्थान को हटा दिया गया। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय को गैरसैंण से खैरासैंण स्थानांतरित कर दिया गया। इंटर कॉलेज परिसर में संचालित होने वाला जयहरीखाल महाविद्यालय गुमखाल के पास स्यालगांव शिफ्ट कर दिया गया। मॉडल स्कूल को तो बंद ही कर दिया गया।
इन संस्थानों के चलते जयहरीखाल के राजकीय इंटर कॉलेज में छात्र संख्या हजारों में रहती थी। जवाहर और सुभाष छात्रावास पूरी तरह भरे रहते थे। शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय बाजार और रोजगार भी इन्हीं संस्थानों पर निर्भर थे लेकिन संस्थानों के शिफ्ट होने के बाद छात्र संख्या में काफी गिरावट आई और फिर क्षेत्र में पलायन की गति तेज हो गई।
एक दौर था, जब जयहरीखाल शिक्षा के लिए पहचाना जाता था। दूर-दूर से छात्र पढ़ने आते थे। आज वही जगह सूनी पड़ी है, यह बेहद दुखद है।
-संपूर्ण सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नागरिक।
सरकारी कार्यालय और शिक्षण संस्थान हटे, लेकिन उनके विकल्प नहीं दिए गए। यहां शिक्षा के नए केंद्र विकसित किए जाते, तो स्थिति अलग होती।
-हरिमोहन रावत, पूर्व अध्यक्ष, प्रधान संघ।
जयहरीखाल में स्थानांतरण नीति स्तर पर बड़ी भूल रही हैं। यहां तकनीकी, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए था।
-दीपक भंडारी, पूर्व प्रमुख।
जब शिक्षा कमजोर होती है तो सामाजिक और आर्थिक ढांचा भी प्रभावित होता है। जयहरीखाल को फिर से शिक्षा के मानचित्र पर लाने की जरूरत है।
-कर्नल कुलदीप गुसाईं, (से.नि.)
संस्थान हटने से केवल शिक्षा ही नहीं, क्षेत्र की पहचान और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेज रहे हैं।
-निरंजन कुमार जोशी, समाजसेवी।
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बच्चों के भविष्य के लिए पलायन को मजबूर हुए लोग
जयहरीखाल। एक समय गढ़वाल अंचल में शिक्षा का मजबूत केंद्र रहा जयहरीखाल आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों के अन्यत्र शिफ्ट होने से ऐतिहासिक कस्बे की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
जयहरीखाल में संचालित बीटीसी प्रशिक्षण संस्थान को हटा दिया गया। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय को गैरसैंण से खैरासैंण स्थानांतरित कर दिया गया। इंटर कॉलेज परिसर में संचालित होने वाला जयहरीखाल महाविद्यालय गुमखाल के पास स्यालगांव शिफ्ट कर दिया गया। मॉडल स्कूल को तो बंद ही कर दिया गया।
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इन संस्थानों के चलते जयहरीखाल के राजकीय इंटर कॉलेज में छात्र संख्या हजारों में रहती थी। जवाहर और सुभाष छात्रावास पूरी तरह भरे रहते थे। शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय बाजार और रोजगार भी इन्हीं संस्थानों पर निर्भर थे लेकिन संस्थानों के शिफ्ट होने के बाद छात्र संख्या में काफी गिरावट आई और फिर क्षेत्र में पलायन की गति तेज हो गई।
एक दौर था, जब जयहरीखाल शिक्षा के लिए पहचाना जाता था। दूर-दूर से छात्र पढ़ने आते थे। आज वही जगह सूनी पड़ी है, यह बेहद दुखद है।
-संपूर्ण सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नागरिक।
सरकारी कार्यालय और शिक्षण संस्थान हटे, लेकिन उनके विकल्प नहीं दिए गए। यहां शिक्षा के नए केंद्र विकसित किए जाते, तो स्थिति अलग होती।
-हरिमोहन रावत, पूर्व अध्यक्ष, प्रधान संघ।
जयहरीखाल में स्थानांतरण नीति स्तर पर बड़ी भूल रही हैं। यहां तकनीकी, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए था।
-दीपक भंडारी, पूर्व प्रमुख।
जब शिक्षा कमजोर होती है तो सामाजिक और आर्थिक ढांचा भी प्रभावित होता है। जयहरीखाल को फिर से शिक्षा के मानचित्र पर लाने की जरूरत है।
-कर्नल कुलदीप गुसाईं, (से.नि.)
संस्थान हटने से केवल शिक्षा ही नहीं, क्षेत्र की पहचान और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेज रहे हैं।
-निरंजन कुमार जोशी, समाजसेवी।

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