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Kotdwar News: लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग को लेकर संघर्ष रहेगा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 14 Feb 2026 05:36 PM IST
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बोले, यूकेडी के केंद्रीय संगठन मंत्री डंडरियाल, कहा- निर्णय की काॅपी मिलने पर करेंगे विस्तृत अध्ययन
कोटद्वार। यूकेडी के केंद्रीय संगठन मंत्री व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग को लेकर गौरव बंसल की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट से मार्ग निर्माण पर लगी रोक हट गई है। कोर्ट के निर्णय की काॅपी मिलने के बाद उसका विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसके बाद ही तय किया जाएगा कि ऑर्डर को चैलेंज करना है अथवा नहीं। कहा कि यह प्रारंभिक जीत है और अभी संघर्ष बाकी है।
शिब्बूनगर स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता में रोहित डंडरियाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अनुपम बिष्ट के हस्तक्षेप प्रार्थनापत्र की सुनवाई के दौरान उन्होंने कोटद्वार के लोगों का पक्ष कोर्ट के समक्ष दृढ़ता से रखा। कोर्ट को अवगत कराया गया कि यह रोड ब्रिटिश शासनकाल की है और इस मार्ग पर कभी भी मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना नहीं हुई। कोर्ट में अभी तक उत्तराखंड के लोगों के प्रति गलत भावना को प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कहा कि रामनगर-कोटद्वार (कंडी मार्ग) पर बस संचालन को लेकर पीसी जोशी के हस्तक्षेप प्रार्थनापत्र पर सुनवाई जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में भी फैसला जनता के पक्ष में आएगा।
सत्ता पक्ष द्वारा इसका श्रेय लेने के सवाल पर रोहित ने कहा कि पिछले छह सालों में सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि ने कोर्ट में कोई पैरवी नहीं की। अगर दीदी इस कार्य में लगी होती तो उनके पास बोलने के लिए कुछ होता। सत्तापक्ष का काम श्रेय लेने का रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों समेत सभी से अपील की कि कोर्ट ऑर्डर आने तक किसी भी प्रकार की बयानबाजी से बचें। इस मौके पर वरिष्ठ नेता डॉ. शक्तिशैल कपरवाण, महेंद्र सिंह रावत, प्रवेश नवानी, मुकेश बड़थ्वाल आदि मौजूद रहे।
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कोटद्वार। यूकेडी के केंद्रीय संगठन मंत्री व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग को लेकर गौरव बंसल की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट से मार्ग निर्माण पर लगी रोक हट गई है। कोर्ट के निर्णय की काॅपी मिलने के बाद उसका विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसके बाद ही तय किया जाएगा कि ऑर्डर को चैलेंज करना है अथवा नहीं। कहा कि यह प्रारंभिक जीत है और अभी संघर्ष बाकी है।
शिब्बूनगर स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता में रोहित डंडरियाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अनुपम बिष्ट के हस्तक्षेप प्रार्थनापत्र की सुनवाई के दौरान उन्होंने कोटद्वार के लोगों का पक्ष कोर्ट के समक्ष दृढ़ता से रखा। कोर्ट को अवगत कराया गया कि यह रोड ब्रिटिश शासनकाल की है और इस मार्ग पर कभी भी मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना नहीं हुई। कोर्ट में अभी तक उत्तराखंड के लोगों के प्रति गलत भावना को प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कहा कि रामनगर-कोटद्वार (कंडी मार्ग) पर बस संचालन को लेकर पीसी जोशी के हस्तक्षेप प्रार्थनापत्र पर सुनवाई जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में भी फैसला जनता के पक्ष में आएगा।
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सत्ता पक्ष द्वारा इसका श्रेय लेने के सवाल पर रोहित ने कहा कि पिछले छह सालों में सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि ने कोर्ट में कोई पैरवी नहीं की। अगर दीदी इस कार्य में लगी होती तो उनके पास बोलने के लिए कुछ होता। सत्तापक्ष का काम श्रेय लेने का रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों समेत सभी से अपील की कि कोर्ट ऑर्डर आने तक किसी भी प्रकार की बयानबाजी से बचें। इस मौके पर वरिष्ठ नेता डॉ. शक्तिशैल कपरवाण, महेंद्र सिंह रावत, प्रवेश नवानी, मुकेश बड़थ्वाल आदि मौजूद रहे।