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Kotdwar News: सीने में दर्द से तड़पती रही महिला, अस्पताल में लटका मिला ताला
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थलीसैंण। विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्र में चौंडा गांव निवासी एक महिला की मंगलवार को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां अस्पताल पर ताला लटका हुआ मिला। सीएमओ ने मामले की जांच के साथ ही अस्पताल के चिकित्सक व फार्मासिस्ट के वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल चौथान पट्टी के चौंडा गांव निवासी नंदुली देवी (46) को मंगलवार सुबह से ही सीने में दर्द की शिकायत हुई। दर्द बढ़ता देख परिजन उन्हें करीब 10.30 बजे पीएचसी उफरैंखाल उपचार के लिए ले गए लेकिन अस्पताल बंद मिला और मरीज फर्श पर लेटकर दर्द से तड़पती रही। इस पर परिजन उन्हें प्राइवेट चिकित्सक के पास ले गए, जहां चिकित्सक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हायर सेंटर ले जाने की बात कही। मजबूरी में परिजनों को निजी वाहन कर उफरैंखाल से करीब 150 किमी दूर रामनगर की दौड़ लगानी पड़ी। पति जगतराम ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते मरीज को समय से उपचार नहीं मिल पाया। बताया कि गांव के पास ही अस्पताल होने के बाद भी ग्रामीणों को आए दिन रामनगर और काशीपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। बताया कि पत्नी की हालत में फिलहाल सुधार है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिव मोहन शुक्ला ने एमओआईसी थलीसैंण को जांच के आदेश दिए हैं। जबकि उफरैंखाल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. शशांक शेखर और फार्मासिस्ट राकेश कुमार के वेतन आहरण पर रोक लगा दी है।
सीएमओ डॉ. शुक्ला ने बताया कि चिकित्सक का तबादला हो चुका है और रिलीव होने के लिए दफ्तर आए हुए थे, लेकिन मामले के बाद उनका तबादला निरस्त करते हुए यथावत रखा गया है। बताया कि अस्पताल में वार्डबॉय और सफाई कर्मी भी नहीं हैं। पूरा अस्पताल दो कर्मचारियों के भरोसे चल रहा था।
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दरअसल चौथान पट्टी के चौंडा गांव निवासी नंदुली देवी (46) को मंगलवार सुबह से ही सीने में दर्द की शिकायत हुई। दर्द बढ़ता देख परिजन उन्हें करीब 10.30 बजे पीएचसी उफरैंखाल उपचार के लिए ले गए लेकिन अस्पताल बंद मिला और मरीज फर्श पर लेटकर दर्द से तड़पती रही। इस पर परिजन उन्हें प्राइवेट चिकित्सक के पास ले गए, जहां चिकित्सक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हायर सेंटर ले जाने की बात कही। मजबूरी में परिजनों को निजी वाहन कर उफरैंखाल से करीब 150 किमी दूर रामनगर की दौड़ लगानी पड़ी। पति जगतराम ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते मरीज को समय से उपचार नहीं मिल पाया। बताया कि गांव के पास ही अस्पताल होने के बाद भी ग्रामीणों को आए दिन रामनगर और काशीपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। बताया कि पत्नी की हालत में फिलहाल सुधार है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिव मोहन शुक्ला ने एमओआईसी थलीसैंण को जांच के आदेश दिए हैं। जबकि उफरैंखाल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. शशांक शेखर और फार्मासिस्ट राकेश कुमार के वेतन आहरण पर रोक लगा दी है।
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सीएमओ डॉ. शुक्ला ने बताया कि चिकित्सक का तबादला हो चुका है और रिलीव होने के लिए दफ्तर आए हुए थे, लेकिन मामले के बाद उनका तबादला निरस्त करते हुए यथावत रखा गया है। बताया कि अस्पताल में वार्डबॉय और सफाई कर्मी भी नहीं हैं। पूरा अस्पताल दो कर्मचारियों के भरोसे चल रहा था।
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