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Nainital News: छात्रनेताओं के आगे झुका प्रशासन, पीएचडी विज्ञापन वापस, बैक पेपर की जगी नई उम्मीद
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नैनीताल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से छात्रहितों की अनदेखी के खिलाफ आवाज उठाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन को झुकना पड़ा है। छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद प्रशासन ने छात्रों की लगभग सभी मांगों को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिए हैं। सोमवार को नैनीताल व हल्द्वानी से कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पहुंचे छात्रनेताओं ने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद उन्होंने विवि के अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया। इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर रही। विश्वविद्यालय ने पूर्व में जारी किए पीएचडी प्रवेश विज्ञापन को वापस ले लिया है। छात्र लंबे समय से मांग कर रहे थे कि पीएचडी की परीक्षाएं विश्वविद्यालय स्तर पर ही आयोजित की जाएं न कि केवल नेट के आधार पर प्रवेश दिया जाए। परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की शिकायतों पर भी प्रशासन ने नरम रुख अपनाया है। बीएससी (जंतु विज्ञान) और बी.कॉम (आयकर) के प्रश्नपत्रों की उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग स्वीकार कर ली गई है। अब इन कॉपियों को संबंधित विषय संयोजकों को दिखाया जाएगा और उनकी रिपोर्ट के आधार पर छात्रों के भविष्य का फैसला होगा। एक और बड़ी राहत बैक पेपर पर मिली है। हालांकि नई शिक्षा नीति के तहत यूजीसी ने बैक पेपर का प्रावधान खत्म कर दिया है लेकिन छात्रों के व्यापक हितों को देखते हुए विश्वविद्यालय अब यूजीसी को एक सकारात्मक सिफारिश पत्र लिखेगा। इस मौके पर एबीवीपी के जिला संयोजक धीरज गरकोटी, भानु प्रताप सिंह चौहान, मोहित पंत, धीरज बिष्ट, आर्यन बेलवाल, यतिन पांडे, तेजस खुल्बे, हर्षित पाठक आदि मौजूद रहे।
विवि प्रशासन छात्र हितों के प्रति संवेदनशील है। पीएचडी प्रवेश विज्ञापन को छात्रों की मांग पर वापस लिया गया है। परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विषय संयोजकों की रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष निर्णय होगा। छात्रों के भविष्य के लिए यूजीसी को सकारात्मक सिफारिश भेजेंगे
- डीएस रावत, कुलपति, कुमाऊं विश्वविद्यालय
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विवि प्रशासन छात्र हितों के प्रति संवेदनशील है। पीएचडी प्रवेश विज्ञापन को छात्रों की मांग पर वापस लिया गया है। परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विषय संयोजकों की रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष निर्णय होगा। छात्रों के भविष्य के लिए यूजीसी को सकारात्मक सिफारिश भेजेंगे
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- डीएस रावत, कुलपति, कुमाऊं विश्वविद्यालय