अंकिता भंडारी प्रकरण: चार में से दो एफआईआर कोर्ट ने की रद्द, दो मामलों में जांच जारी रखने के दिए निर्देश
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े सोशल मीडिया ऑडियो-वीडियो मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर में से दो को रद्द कर दिया। दो मामलों में जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो-वीडियो सामग्री से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर में से दो को समान आरोपों पर आधारित मानते हुए रद्द कर दिया जबकि शेष दो मामलों में जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुरेश राठौर ने देहरादून और हरिद्वार में उनके खिलाफ दर्ज चार अलग-अलग एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। उनका कहना था कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ की ओर से अदालत को बताया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो-वीडियो सामग्री के माध्यम से शिकायतकर्ताओं की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।
मामले का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि हरिद्वार के बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज एफआईआर संख्या 0534/2025 और 0356/2025 में लगाए गए आरोप मूल रूप से वही हैं जो देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0004/2026 में शामिल हैं। न्यायालय ने कहा कि इन दोनों मामलों के शिकायतकर्ता स्वयं प्रत्यक्ष पीड़ित नहीं थे जबकि कथित रूप से प्रभावित व्यक्ति पहले ही अलग एफआईआर दर्ज करा चुका था। सर्वोच्च न्यायालय के टीटी एंटनी और राजेंद्र बिहारी लाल मामलों में स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए अदालत ने दोनों एफआईआर को निरस्त कर दिया।
अदालत ने नेहरू कॉलोनी देहरादून में आरती गौड़ की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर संख्या 0420/2025 तथा डालनवाला थाने में दुष्यंत कुमार गौतम द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 0004/2026 को रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन मामलों में संज्ञेय अपराध के तत्व परिलक्षित होते हैं और इनकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। यदि किसी के पास किसी अपराध से संबंधित सूचना या साक्ष्य हैं तो उन्हें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए न कि सोशल मीडिया का उपयोग किसी की छवि खराब करने के लिए किया जाए।
न्यायालय ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सार्वजनिक हित के मुद्दों को उठाने के लिए होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए। अदालत के अनुसार यह जांच का विषय है कि कथित ऑडियो-वीडियो क्लिप किस उद्देश्य से प्रसारित किए गए और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद अथवा सुनियोजित साजिश थी। इस पहलू की गहन जांच आवश्यक है, इसलिए संबंधित जांच एजेंसियों को अपना कार्य जारी रखने दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सुरेश राठौर की दो याचिकाएं खारिज करते हुए उन्हें मिली अंतरिम संरक्षण भी समाप्त कर दिया जबकि दो अन्य याचिकाएं स्वीकार कर हरिद्वार में दर्ज दोनों एफआईआर रद्द कर दीं। साथ ही अदालत ने आरती गौड़ और दुष्यंत कुमार गौतम को सुरक्षा संबंधी किसी भी आशंका की स्थिति में डीजीपी और संबंधित एसएसपी से संपर्क करने की स्वतंत्रता प्रदान की तथा अधिकारियों को खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए।