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Nainital News: कार्यशाला में जंगल की आग और शहरी लचीलेपन पर मंथन
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नैनीताल। डॉ. आरएस टोलिया प्रशासन अकादमी में हिमालय की आपदाओं और दीर्घकालिक समाधानों पर दो दिवसीय कार्यशाला में बुध्पवार को दा प्रबंधन में नई तकनीक, जंगल की आग और शहरी लचीलेपन पर गहन चर्चा हुई। समापन पर विभागीय अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रोफेसर और शोधकर्ता सहित करीब 135 प्रतिभागी शामिल हुए।
कार्यशाला के दूसरे दिन तीन सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में आपदा प्रबंधन में नई तकनीकों जैसे भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), सुदूर संवेदन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर जोर दिया गया। आईआईटी रुड़की के सेवानिवृत्त प्रो. एसके घोष ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और भूस्खलन जैसी आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच नई तकनीक जोखिम आकलन और समय पर चेतावनी देने में सहायक है। दूसरा सत्र हिमालय में जंगल की आग के प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली पर केंद्रित था। कुमाऊं की मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) तेजस्विनी पाटिल और अन्य विशेषज्ञों ने समुदाय आधारित उपायों और पारंपरिक ज्ञान के लाभ पर चर्चा की। तीसरे सत्र में शहरी विकास के निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी सहित विशेषज्ञों ने शहरी लचीलेपन और पहाड़ी इलाकों की टिकाऊ योजना पर विचार साझा किए।
कार्यशाला के दूसरे दिन तीन सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में आपदा प्रबंधन में नई तकनीकों जैसे भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), सुदूर संवेदन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर जोर दिया गया। आईआईटी रुड़की के सेवानिवृत्त प्रो. एसके घोष ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और भूस्खलन जैसी आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच नई तकनीक जोखिम आकलन और समय पर चेतावनी देने में सहायक है। दूसरा सत्र हिमालय में जंगल की आग के प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली पर केंद्रित था। कुमाऊं की मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) तेजस्विनी पाटिल और अन्य विशेषज्ञों ने समुदाय आधारित उपायों और पारंपरिक ज्ञान के लाभ पर चर्चा की। तीसरे सत्र में शहरी विकास के निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी सहित विशेषज्ञों ने शहरी लचीलेपन और पहाड़ी इलाकों की टिकाऊ योजना पर विचार साझा किए।
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