{"_id":"6a398bcb2b2f7fe2960bd322","slug":"capsicum-plants-growing-in-plastic-foil-nainital-news-c-418-1-shld1006-7822-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: प्लास्टिक की पन्नी में उगा रहे शिमला मिर्च के पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: प्लास्टिक की पन्नी में उगा रहे शिमला मिर्च के पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पहाड़पानी (नैनीताल)। ओलावृष्टि और धूप से शिमला मिर्च के पौधों की जड़ें बचाने के लिए धारी क्षेत्र के किसानों ने पहली बार प्लास्टिक की पन्नी का इस्तेमाल शुरू किया है। किसान खेत में बड़े साइज की पन्नी बिछाकर बीच-बीच में पौधों के लिए छेद बनाकर पौधे उगा रहे हैं।
दीनी मल्ली के किसान दीपू खोलिया ने बताया कि पन्नी में छेद बनाकर मिर्च के पौधे लगाने के बाद से फसलों की ग्रोथ में काफी वृद्धि हुई है। गांव के शेखर दुम्का ने बताया कि प्लास्टिक में शिमला मिर्च की अच्छी पैदावार हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे धूप और ओलावृष्टि के समय भी पौधों को अधिक नुकसान नहीं होता है। फसलें भी जल्दी तैयार हो रही हैं। महतोलियागांव के किसान ललित महतोलिया ने कहा कि प्लास्टिक की पन्नी में शिमला मिर्च के पौधे लगाने के बाद गुड़ाई नहीं करनी पड़ती है। खरपतवार की समस्या भी दूर होती है। राजू बहुगुणा ने कहा कि पहली बार इस तकनीक से किसानों को लाभ हुआ है। सिंचाई के लिए पानी की भी अधिक जरूरत नहीं पड़ रही है।
दीनी मल्ली के किसान दीपू खोलिया ने बताया कि पन्नी में छेद बनाकर मिर्च के पौधे लगाने के बाद से फसलों की ग्रोथ में काफी वृद्धि हुई है। गांव के शेखर दुम्का ने बताया कि प्लास्टिक में शिमला मिर्च की अच्छी पैदावार हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे धूप और ओलावृष्टि के समय भी पौधों को अधिक नुकसान नहीं होता है। फसलें भी जल्दी तैयार हो रही हैं। महतोलियागांव के किसान ललित महतोलिया ने कहा कि प्लास्टिक की पन्नी में शिमला मिर्च के पौधे लगाने के बाद गुड़ाई नहीं करनी पड़ती है। खरपतवार की समस्या भी दूर होती है। राजू बहुगुणा ने कहा कि पहली बार इस तकनीक से किसानों को लाभ हुआ है। सिंचाई के लिए पानी की भी अधिक जरूरत नहीं पड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन