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Haldwani: संख्या बढ़ने से पहाड़ों पर भी पहुंच रहे बाघ, इस कारण बढ़ रही हैं मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं
Fri, 07 Aug 2026 06:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा
शंकर पांडेय, हल्द्वानी
शंकर पांडेय, हल्द्वानी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 07 Aug 2026 06:45 AM IST
सार
विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व की सीमित धारण क्षमता और भोजन-क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के चलते बाघ मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
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tiger
- फोटो : instagram
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विस्तार
कार्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार बढ़ती संख्या अब नए क्षेत्रों तक उनके पहुंचने का कारण बन रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व की सीमित धारण क्षमता और भोजन-क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के चलते बाघ मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
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इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। सेवानिवृत्त डीएफओ बलवंत सिंह शाही के अनुसार, वर्ष 1973 में कार्बेट में बाघों की संख्या करीब 40 थी, जो बढ़कर 2022 में 266 हो गई। हर गणना में संख्या बढ़ने से अनुमान है कि अगली गणना में भी यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
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वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि नर बाघ अपना क्षेत्र सुरक्षित रखने के लिए कई किलोमीटर तक विचरण करते हैं। पर्याप्त शिकार न मिलने पर वे नए इलाकों की ओर बढ़ जाते हैं। यही कारण है कि अब अल्मोड़ा के बिनसर, जागेश्वर और बागेश्वर के सुंदरढूंगा क्षेत्र तक बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है।
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