सुखवंत आत्महत्या प्रकरण : हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
नैनीताल हाईकोर्ट ने काशीपुर के किसान आत्महत्या मामले में तीन
याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मुकदमे को निरस्त करने संबंधी याचिका पर सरकार को जवाब देने के निर्देश दिए।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने काशीपुर के किसान के आत्महत्या करने के मामले में याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक व उनके खिलाफ दर्ज मुकदमें को निरस्त करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर पूर्व में पारित कुलविंदर सिंह व अन्य में दिए गए आदेश के आधार पर तीन अन्य याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तिथि नियत की है।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार जगवीर सिंह उर्फ जगवीर रॉय व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि इस प्रकरण पर मुख्य आरोपित व अन्य की गिरफ्तारी पर पहले ही कोर्ट रोक लगा चुकी है। याचिका में कहा कि हल्द्वानी के काठगोदाम के होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले फेसबुक पर पुलिस व अन्य लोगों पर आरोप लगाए थे। एफआईआर में कहा गया था कि उनके साथ जमीन के मामले में धोखाधड़ी हुई है उनसे करीब चार करोड़ ठग लिए गए, जब इसकी शिकायत बार बार पुलिस से की गयी तो पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्यवाही नहीं की गई।
बाद में किसान के बड़े भाई की तहरीर पर 26 लोगों पर काशीपुर के आईटीआई थाने में नामजद मुकदमा दर्ज किया। जिसमें अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविन्दर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीषआशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेंद्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवन्त सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा और जहीर के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। याचिकाकर्ता कि तरफ से कहा गया कि उनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें इस केस मे गलत फंसाया गया है। यह केस दो पक्षों के बीच आपसी जमीन से जुड़ा मामला है, किसान ने आत्महत्या की है, इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के साथ ही मुकदमे को निरस्त किया जाए।
सुनवाई के दौरान व सरकार की तरफ से कहा गया कि यह मामला जमीनी विवाद से जुडा है और पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसकी जांच चल रही है। मामला गंभीर होने के कारण डीजीपी इस केस की खुद मॉनिटरिंग कर रहे है। मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है।
