High Court: गंगा की धारा ने बदली दो राज्यों की सीमा, भूमि सीमाकंन पर यूपी और उत्तराखंड में हो गया विवाद
गंगा नदी की धारा बदलने से सीमा विवाद में फंसे हरिद्वार के किसानों को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खेती की अनुमति देने के लिए जिलाधिकारी को छह सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
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गंगा नदी की धारा बदलने से उत्पन्न हुए उत्तराखंड–उत्तर प्रदेश सीमा विवाद में फंसे हरिद्वार जिले के किसानों को राहत की उम्मीद जगी है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जमीन पर खेती से रोके जाने की शिकायत पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी, हरिद्वार को निर्धारित समय में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार हरिद्वार जिले के ग्राम रामपुर रायघाटी, काबुलपुरी रायघाटी, भिक्कमपुर और भिक्कमपुर जीतपुर के निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि गंगा की धारा में परिवर्तन के कारण यह विवाद खड़ा हो गया है कि उनकी भूमि उत्तराखंड में है या उत्तर प्रदेश में। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनके अनुरोध पर दोनों राज्यों के राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया और सीमांकन के लिए सीमा स्तंभ (पिलर) भी स्थापित किए गए। याचिका में आरोप लगाया गया कि संयुक्त निरीक्षण के बावजूद उत्तर प्रदेश के वन विभाग के अधिकारी, उत्तराखंड क्षेत्र में स्थित उनकी भूमि पर कृषि कार्य नहीं करने दे रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से उनके पूर्व प्रतिवेदनों पर तत्काल कार्रवाई करवाने, दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के बीच पिलर संख्या 232 से 236 तक का संयुक्त सर्वे कर सीमांकन करवाने तथा खेती के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाने की मांग की थी। कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी, हरिद्वार को निर्देश दिए कि वे याचिकाकर्ताओं के 17 जुलाई 2025 के प्रतिवेदन तथा किसी भी पूरक प्रतिवेदन पर प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लें।
