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Nainital News: कागजों में जिंदा न्यूरो सर्जरी विभाग कोमा में जाने की ओर
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 09 Feb 2026 02:06 AM IST
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प्रतीकात्मक
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभाग में तैनात एकमात्र न्यूरो सर्जन का कार्यकाल 11 फरवरी को समाप्त हो रहा है। दो दिन बचे हैं लेकिन निदेशालय स्तर से उनका करार अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। बेस अस्पताल के एक न्यूरो सर्जन यहां पहले अटैच थे जो एक हफ्ते पहले इस्तीफा देकर चले गए हैं। स्थिति यह हो गई है कि अगर करार आगे नहीं बढ़ाया गया तो एसटीएच में न्यूरो सर्जरी विभाग पूरी तरह बंद हो जाएगा।
एक हफ्ते से यहां न्यूरो सर्जरी से संबंधित मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भागना पड़ रहा है। यहां तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक बृहस्पतिवार से अवकाश पर हैं। इस कारण जिले और कुमाऊं के दूर-दराज इलाकों के मरीज सूचना न होने के कारण यहां आने के बाद बैरंग लौट रहे हैं। एक ओर आने-जाने का खर्चा, दूसरा इलाज नहीं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना मजबूरी बन गया है। न्यूरो सर्जन का तीन साल का करार अक्तूबर में ही खत्म हो चुका था। उसके बाद तीन महीने कांट्रेक्ट बढ़ाया गया। अब 11 फरवरी को यह कांट्रेक्ट भी खत्म हो रहा है।
सड़क दुर्घटनाओं के समय सबसे महत्वपूर्ण है न्यूरो विभाग
सुशीला तिवारी अस्पताल में न्यूरो सर्जरी बेहद महत्वपूर्ण विभाग है। करीब 2500 की ओपीडी में न्यूरो सर्जरी विभाग में 260 से अधिक मरीज इलाज को पहुंचते हैं। अक्सर पर्वतीय जिलों में दुर्घटनाएं होने पर गंभीर मरीज इसी अस्पताल में लाए जाते हैं। न्यूरो में विभाग सिर, कमर, रीढ़ की हड्डी की चोट, स्ट्रोक, सिर की सूजन, ऑपरेशन समेत शरीर में कई गंभीर चोट पर घायलों का उपचार और सर्जरी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। हफ्ते में दो से तीन दिन यहां ऑपरेशन के लिए तय रहते हैं।
नए न्यूरो सर्जन को नियुक्त किया जाना है। मैं अभी बाहर हूं। एक दो दिन में आकर व्यवस्थाएं ठीक बनाने का प्रयास किया जाएगा। जल्द ही अस्पताल को नया न्यूरो सर्जन मिल जाएगा। - डॉ. जीएस तितियाल, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी।
जब तक नए सर्जन की नियुक्ति नहीं होती है वैकल्पिक व्यवस्था के तहत वर्तमान में तैनात न्यूरो सर्जन का कार्यकाल एक-दो माह के लिए बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर कोशिश की जा रही है। - डॉ. अजय आर्या, निदेशक चिकित्सा शिक्षा, उत्तराखंड
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एक हफ्ते से यहां न्यूरो सर्जरी से संबंधित मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भागना पड़ रहा है। यहां तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक बृहस्पतिवार से अवकाश पर हैं। इस कारण जिले और कुमाऊं के दूर-दराज इलाकों के मरीज सूचना न होने के कारण यहां आने के बाद बैरंग लौट रहे हैं। एक ओर आने-जाने का खर्चा, दूसरा इलाज नहीं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना मजबूरी बन गया है। न्यूरो सर्जन का तीन साल का करार अक्तूबर में ही खत्म हो चुका था। उसके बाद तीन महीने कांट्रेक्ट बढ़ाया गया। अब 11 फरवरी को यह कांट्रेक्ट भी खत्म हो रहा है।
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सड़क दुर्घटनाओं के समय सबसे महत्वपूर्ण है न्यूरो विभाग
सुशीला तिवारी अस्पताल में न्यूरो सर्जरी बेहद महत्वपूर्ण विभाग है। करीब 2500 की ओपीडी में न्यूरो सर्जरी विभाग में 260 से अधिक मरीज इलाज को पहुंचते हैं। अक्सर पर्वतीय जिलों में दुर्घटनाएं होने पर गंभीर मरीज इसी अस्पताल में लाए जाते हैं। न्यूरो में विभाग सिर, कमर, रीढ़ की हड्डी की चोट, स्ट्रोक, सिर की सूजन, ऑपरेशन समेत शरीर में कई गंभीर चोट पर घायलों का उपचार और सर्जरी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। हफ्ते में दो से तीन दिन यहां ऑपरेशन के लिए तय रहते हैं।
नए न्यूरो सर्जन को नियुक्त किया जाना है। मैं अभी बाहर हूं। एक दो दिन में आकर व्यवस्थाएं ठीक बनाने का प्रयास किया जाएगा। जल्द ही अस्पताल को नया न्यूरो सर्जन मिल जाएगा। - डॉ. जीएस तितियाल, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी।
जब तक नए सर्जन की नियुक्ति नहीं होती है वैकल्पिक व्यवस्था के तहत वर्तमान में तैनात न्यूरो सर्जन का कार्यकाल एक-दो माह के लिए बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर कोशिश की जा रही है। - डॉ. अजय आर्या, निदेशक चिकित्सा शिक्षा, उत्तराखंड