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Uttarakhand: न्यूनतम वेतन न देने पर हाईकोर्ट सख्त, चिकित्सा निदेशक को लेना होगा निर्णय
Wed, 19 Aug 2026 11:10 PM IST
Heera
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: Heera
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:10 PM IST
सार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने श्रीनगर स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली आयुर्विज्ञान संस्थान के नर्सिंग अधिकारियों को न्यूनतम वेतन न दिए जाने के मामले में चिकित्सा निदेशक को कानून सम्मत निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने श्रीनगर स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान के नर्सिंग अधिकारियों को न्यूनतम वेतनमान न दिए जाने के मामले पर सुनवाई के बाद चिकित्सा निदेशक को कानून सम्मत निर्णय लेने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने प्रतीक कुमार डांगरोलिया और अन्य की ओर से दायर 10 अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे वर्ष 2010 से स्टाफ नर्स (अब नर्सिंग ऑफिसर) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान में उनके जैसे ही अन्य समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन उन्हें इसके लाभ से वंचित रखा गया है जो सेवा नियमावली के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि उनका मामला दो जुलाई 2026 के शासनादेश से पूरी तरह आच्छादित है। वे इस हक को पाने के अधिकारी हैं। इसके अलावा संस्थान के प्राचार्य ने न्यूनतम वेतनमान के लिए 29 मई 2026 को जो सूची जारी की थी, जिसमें मुख्य याचिकाकर्ता का नाम आठवें स्थान पर मौजूद है।
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प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पहले कोई औपचारिक मांग नहीं की थी। कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता दो सप्ताह के अंदर चिकित्सा शिक्षा निदेशक को अपना प्रत्यावेदन सौंपे और निदेशक अगले छह सप्ताह के अंदर कानून सम्मत निर्णय लेकर उनके प्रत्यावेदन को निस्तारित करें।(लता नेगी)
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