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Pauri News: बिना पूर्व अनुमति एफआईआर के आदेश को कोर्ट ने किया निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Thu, 09 Apr 2026 04:21 PM IST
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पौड़ी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पौड़ी धर्म सिंह की अदालत ने जिला पंचायत के दो कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी लोक सेवक के खिलाफ निजी शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराने से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी अनिवार्य है।
मामले में जिला पंचायत के तदर्थ जेई सुदर्शन सिंह रावत और मुख्य सहायक जगदीश रौथाण ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) पौड़ी के 24 फरवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। सीजेएम ने पुलिस को आरोपी दोनों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता कफलना निवासी करन सिंह ने आरोप लगाया था कि जिला पंचायत में तैनात इन कर्मचारियों ने आपराधिक साजिश के तहत करीब 75 लाख रुपये का गबन किया। इसमें एक उपनल कर्मचारी की पत्नी को रोजगार देने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर टेंडर जारी किया गया था। जिला मजिस्ट्रेट की जांच में वित्तीय गबन का खुलासा हुआ था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी लोक सेवकों के खिलाफ बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के एफआईआर दर्ज करने का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों में पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत के आदेश निरस्त कर दिया।हालांकि अदालत ने शिकायतकर्ता को यह भी स्वतंत्रता दी है कि वह सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त कर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।
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