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Pauri News: डामरीकरण न होने से तय करनी पड़ रही 10 किमी की अतिरिक्त दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Thu, 12 Mar 2026 04:57 PM IST
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कोट और पौड़ी के करीब छह गांवों को जोड़ता है बिलकेदार-गौरीकोट मोटर मार्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। विकास खंड कोट और पौड़ी के करीब छह गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने वाले बिलकेदार-गौरीकोट मार्ग का डामरीकरण और सुधारीकरण नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गिरगांव के लोगों को खंडाह होते हुए श्रीनगर जाने में करीब 10 किमी की अतिरिक्त दूरी नापनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने लोनिवि से मार्ग के सुधारीकरण और डामरीकरण की मांग की l
पौड़ी और कोट ब्लॉक के बिंदूला, तलसारी, कुकड़ गांव, गोरीकोट गिर समेत कई गांवों को जोड़ने वाले मार्ग का आज तक डामरीकरण नहीं हो पाया है। लोनिवि की ओर से वर्ष 2006 में 144.90 लाख की लागत से मार्ग का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। विभाग ने सात किमी मार्ग निर्माण और एक छोटे पुल बनाने में करीब दस वर्ष का समय लगा दिया। इसके बाद भी मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा बना है। महेंद्र, पंकज, आशीष, गोविंद, कृष्णा, नरेंद्र, सुरेंद्र व रविंद्र ने कहा कि निर्माण के डेढ़ दशक बाद भी क्षेत्र के करीब छह दर्जन से अधिक गांवों के लोग खस्ताहाल मार्ग से जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे है। कई बार डामरीकरण की मांग की गई लेकिन किसी ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता किशोर कुमार ने बताया कि मार्ग के डामरीकरण के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई थी लेकिन इस वित्तीय वर्ष में योजना को पैसा नहीं मिल पाया है। अगले वित्तीय वर्ष में स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
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श्रीनगर। विकास खंड कोट और पौड़ी के करीब छह गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने वाले बिलकेदार-गौरीकोट मार्ग का डामरीकरण और सुधारीकरण नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गिरगांव के लोगों को खंडाह होते हुए श्रीनगर जाने में करीब 10 किमी की अतिरिक्त दूरी नापनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने लोनिवि से मार्ग के सुधारीकरण और डामरीकरण की मांग की l
पौड़ी और कोट ब्लॉक के बिंदूला, तलसारी, कुकड़ गांव, गोरीकोट गिर समेत कई गांवों को जोड़ने वाले मार्ग का आज तक डामरीकरण नहीं हो पाया है। लोनिवि की ओर से वर्ष 2006 में 144.90 लाख की लागत से मार्ग का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। विभाग ने सात किमी मार्ग निर्माण और एक छोटे पुल बनाने में करीब दस वर्ष का समय लगा दिया। इसके बाद भी मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा बना है। महेंद्र, पंकज, आशीष, गोविंद, कृष्णा, नरेंद्र, सुरेंद्र व रविंद्र ने कहा कि निर्माण के डेढ़ दशक बाद भी क्षेत्र के करीब छह दर्जन से अधिक गांवों के लोग खस्ताहाल मार्ग से जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे है। कई बार डामरीकरण की मांग की गई लेकिन किसी ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता किशोर कुमार ने बताया कि मार्ग के डामरीकरण के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई थी लेकिन इस वित्तीय वर्ष में योजना को पैसा नहीं मिल पाया है। अगले वित्तीय वर्ष में स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
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