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Pauri News: योजना के इंतजार में साल बीते बीस, अब तक नहीं बुझी ग्रामीणों की तीस
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Thu, 21 May 2026 05:31 PM IST
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पेयजल योजना के लिए बीस सालों तक घुमाई पत्रावली, जेजेएम से भी वंचित
मुकेश चंद्र आर्य
पौड़ी। करीब 20 सालों तक शासन प्रशासन में पेयजल योजना के लिए कई पत्रावलियां घुमाईं गईं लेकिन योजना तो दूर गांव को जल जीवन मिशन (जेजेएम) का भी लाभ नहीं मिल पाया। विकासखंड पोखड़ा स्थित कोलागाड़-दो के ग्राम पंचायत बड़ेथ में पानी का संकट गहराता जा रहा है। हैरानी की बात है कि गांव में आज तक भी कोई पेयजल योजना स्वीकृत नहीं हुई और ना ही गांव को जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत आच्छादित किया गया। ऐसे में ग्रामीणों को प्राकृतिक जलस्रोत नौलों से पानी ढोना पड़ रहा है।
वर्तमान में 40 से 45 परिवारों की करीब दो सौ से अधिक लोगों की आबादी गांव में रह रही है। पूरी आबादी गांव के एक नौले पर ही निर्भर है। गांव में स्थायी पेयजल योजना नहीं होने से ग्रामीणों का पूरा दिन पानी सारने में बीत रहा है। बताया कि बीते 20 सालों से गांव में पानी की विकट समस्या बनीं हुई है जबकि भारत सरकार की जल जीवन मिशन योजना से भी गांव को नहीं जोड़ा गया। बताया कि मवेशियों के लिए पीने का पानी जुटाना सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। गांव से करीब एक किमी नीचे नौला है यहीं से मवेशियों को पानी पिलाने ले जाया जाता है। ऐसे में लोगों को जीवन पानी जुटाने में ही बीत रहा है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
- गांव में आज तक भी कोई पेयजल योजना नहीं पहुंची। बीते 20 सालों से गांव में पेयजल समस्या बनीं हुई है। गांव के पालाघाट स्थित प्राकृतिक जलस्रोत से सौर ऊर्जा की पंपिंग लाइन शुरू करने को लेकर कई बार शासन प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया। लेकिन समस्या का समाधान नहीं पा रहा। - विमलेश ध्यानी, ग्राम प्रधान, बड़ेथ।
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- गर्मी बढ़ने के साथ ही गांव में भी पानी की समस्या गहराती जा रही है। गांव से करीब एक मीटर दूर नौले से पानी ढोना पड़ रहा है। महिलाओं की दिनचर्या ही पानी ढोने में गुजर रही है। - कलावती नेगी, बड़ेथ।
- परिवार के लिए पानी लाने के लिए बच्चों को भी भेजते हैं। लेकिन मवेशियों के लिए पीने का पानी जुटाना बड़ी चुनौती बन रही है। सुबह और शाम के समय नौले में जाकर पानी लाना मजबूरी बना हुआ है। गांव में ही लाइन होती तो आराम मिल जाता। - दमयंती देवी, बड़ेथ।
क्या कहते हैं अधिकारी
- बीते सोमवार को मामला जनता मिलन कार्यक्रम में भी उठा था। विभाग को गांव जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों की मांग के अनुसार उन्हें पेयजल योजना का लाभ दिया जाएगा। - स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी पौड़ी।
मुकेश चंद्र आर्य
पौड़ी। करीब 20 सालों तक शासन प्रशासन में पेयजल योजना के लिए कई पत्रावलियां घुमाईं गईं लेकिन योजना तो दूर गांव को जल जीवन मिशन (जेजेएम) का भी लाभ नहीं मिल पाया। विकासखंड पोखड़ा स्थित कोलागाड़-दो के ग्राम पंचायत बड़ेथ में पानी का संकट गहराता जा रहा है। हैरानी की बात है कि गांव में आज तक भी कोई पेयजल योजना स्वीकृत नहीं हुई और ना ही गांव को जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत आच्छादित किया गया। ऐसे में ग्रामीणों को प्राकृतिक जलस्रोत नौलों से पानी ढोना पड़ रहा है।
वर्तमान में 40 से 45 परिवारों की करीब दो सौ से अधिक लोगों की आबादी गांव में रह रही है। पूरी आबादी गांव के एक नौले पर ही निर्भर है। गांव में स्थायी पेयजल योजना नहीं होने से ग्रामीणों का पूरा दिन पानी सारने में बीत रहा है। बताया कि बीते 20 सालों से गांव में पानी की विकट समस्या बनीं हुई है जबकि भारत सरकार की जल जीवन मिशन योजना से भी गांव को नहीं जोड़ा गया। बताया कि मवेशियों के लिए पीने का पानी जुटाना सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। गांव से करीब एक किमी नीचे नौला है यहीं से मवेशियों को पानी पिलाने ले जाया जाता है। ऐसे में लोगों को जीवन पानी जुटाने में ही बीत रहा है।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
- गांव में आज तक भी कोई पेयजल योजना नहीं पहुंची। बीते 20 सालों से गांव में पेयजल समस्या बनीं हुई है। गांव के पालाघाट स्थित प्राकृतिक जलस्रोत से सौर ऊर्जा की पंपिंग लाइन शुरू करने को लेकर कई बार शासन प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया। लेकिन समस्या का समाधान नहीं पा रहा। - विमलेश ध्यानी, ग्राम प्रधान, बड़ेथ।
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- परिवार के लिए पानी लाने के लिए बच्चों को भी भेजते हैं। लेकिन मवेशियों के लिए पीने का पानी जुटाना बड़ी चुनौती बन रही है। सुबह और शाम के समय नौले में जाकर पानी लाना मजबूरी बना हुआ है। गांव में ही लाइन होती तो आराम मिल जाता। - दमयंती देवी, बड़ेथ।
क्या कहते हैं अधिकारी
- बीते सोमवार को मामला जनता मिलन कार्यक्रम में भी उठा था। विभाग को गांव जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों की मांग के अनुसार उन्हें पेयजल योजना का लाभ दिया जाएगा। - स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी पौड़ी।