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Pithoragarh News: सड़क के लिए नापी 105 किमी की दूरी, धरना शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 16 Mar 2026 10:58 PM IST
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पिथौरागढ़। आजादी के 78 साल और राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़क से महरूम सुदूरवर्ती कनार गांव के ग्रामीणों का सब्र अब टूट गया है। सड़क की मांग को लेकर सोमवार को गांव की महिलाएं और पुरुष 105 किलोमीटर की कठिन दूरी तय कर जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का संघर्ष इसी बात से समझा जा सकता है कि वे पहले 20 किलोमीटर पैदल चले और फिर 85 किलोमीटर वाहन से सफर कर मुख्यालय पहुंचे। सिल्थाम तिराहे से कलक्ट्रेट तक निकाली गई आक्रोश रैली में ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अब वे नेताओं के खोखले आश्वासनों पर विश्वास नहीं करेंगे।
ग्रामीणों ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि पिछले दो दशकों में समय पर उपचार न मिल पाने के कारण गांव के आठ से अधिक लोग दम तोड़ चुके हैं। सड़क के अभाव में बीमारों और गर्भवतियों को डंडी-कांडी के सहारे पहाड़ों के संकरे रास्तों से अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है।
ग्राम प्रधान सरिता परिहार और जिला पंचायत सदस्य महेंद्र सिंह परिहार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने दो-टूक कहा है कि जब तक सड़क निर्माण शुरू करने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे धरने से नहीं उठेंगे।
धरना देने वालों में क्षेत्र पंचायत सदस्य जाराजिबली रमेश सिंह धामी, जगत परिहार, मनोज परिहार, विमला देवी, चंपा, दूरी देवी, इंदिरा, भूमि, पार्वती देवी, हेमा, खष्टी देवी, मंजू आदि शामिल रहे।
वन कानून की बाधा पर बड़ी पेशकश
प्रशासन की ओर से पेड़ों के कटान को सड़क निर्माण में बाधा बताए जाने पर ग्रामीणों ने कहा हमें सड़क दो, हम कटने वाले पेड़ों के बदले तीन गुना अधिक पौधरोपण करेंगे और खुद उनका संरक्षण करेंगे। उन्होंने प्रशासन से पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाने की अपील की है।
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ग्रामीणों का संघर्ष इसी बात से समझा जा सकता है कि वे पहले 20 किलोमीटर पैदल चले और फिर 85 किलोमीटर वाहन से सफर कर मुख्यालय पहुंचे। सिल्थाम तिराहे से कलक्ट्रेट तक निकाली गई आक्रोश रैली में ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अब वे नेताओं के खोखले आश्वासनों पर विश्वास नहीं करेंगे।
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ग्रामीणों ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि पिछले दो दशकों में समय पर उपचार न मिल पाने के कारण गांव के आठ से अधिक लोग दम तोड़ चुके हैं। सड़क के अभाव में बीमारों और गर्भवतियों को डंडी-कांडी के सहारे पहाड़ों के संकरे रास्तों से अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है।
ग्राम प्रधान सरिता परिहार और जिला पंचायत सदस्य महेंद्र सिंह परिहार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने दो-टूक कहा है कि जब तक सड़क निर्माण शुरू करने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे धरने से नहीं उठेंगे।
धरना देने वालों में क्षेत्र पंचायत सदस्य जाराजिबली रमेश सिंह धामी, जगत परिहार, मनोज परिहार, विमला देवी, चंपा, दूरी देवी, इंदिरा, भूमि, पार्वती देवी, हेमा, खष्टी देवी, मंजू आदि शामिल रहे।
वन कानून की बाधा पर बड़ी पेशकश
प्रशासन की ओर से पेड़ों के कटान को सड़क निर्माण में बाधा बताए जाने पर ग्रामीणों ने कहा हमें सड़क दो, हम कटने वाले पेड़ों के बदले तीन गुना अधिक पौधरोपण करेंगे और खुद उनका संरक्षण करेंगे। उन्होंने प्रशासन से पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाने की अपील की है।