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Pithoragarh News: बमन गांव के जंगलों में लगी भीषण आग, लाखों की वन संपदा नष्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:42 AM IST
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नाचनी (पिथौरागढ़)। सीमांत क्षेत्र में वन विभाग के वनाग्नि नियंत्रण के तमाम दावे और जागरूकता अभियान धरे के धरे रह गए हैं। पिछले कई दिनों से क्षेत्र के विभिन्न जंगलों में लग रही आग की घटनाओं के बीच अब तल्ला भैंसकोट के बमन गांव खालसा के जंगलों में भीषण आग धधक उठी है। इस घटना में लाखों की वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है और वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बमन गांव के जंगलों में लगी आग ने देखते ही देखते एक बड़े दायरे को अपनी चपेट में ले लिया। पूरा दिन जंगल धधकता रहा लेकिन वन विभाग की कोई भी टीम मौके पर नहीं पहुंची। आग की इस विभीषिका से न केवल बेशकीमती पेड़-पौधे और औषधियां नष्ट हुई हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
धुएं से जनजीवन अस्त-व्यस्त
जंगलों से उठने वाला गहरा धुआं अब निचली बस्तियों और आबादी वाले क्षेत्रों में फैल गया है। इससे आसपास रहने वाले लोग, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। वहीं वन विभाग ने इस आगजनी के लिए अज्ञात लोगों और घास के लालच को जिम्मेदार ठहराया है।
कोट
- पशुओं के लिए नए चारे (घास) के लोभ में कुछ अज्ञात लोग जंगलों को आग के हवाले कर रहे हैं। विडंबना यह है कि ग्रामीण भी आग बुझाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। फिलहाल उपकरणों के साथ फायर वाचरों को मौके पर भेजा गया है और जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया जाएगा। - त्रिलोक सिंह राणा, वन दारोगा
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ग्रामीणों का आरोप है कि बमन गांव के जंगलों में लगी आग ने देखते ही देखते एक बड़े दायरे को अपनी चपेट में ले लिया। पूरा दिन जंगल धधकता रहा लेकिन वन विभाग की कोई भी टीम मौके पर नहीं पहुंची। आग की इस विभीषिका से न केवल बेशकीमती पेड़-पौधे और औषधियां नष्ट हुई हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
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धुएं से जनजीवन अस्त-व्यस्त
जंगलों से उठने वाला गहरा धुआं अब निचली बस्तियों और आबादी वाले क्षेत्रों में फैल गया है। इससे आसपास रहने वाले लोग, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। वहीं वन विभाग ने इस आगजनी के लिए अज्ञात लोगों और घास के लालच को जिम्मेदार ठहराया है।
कोट
- पशुओं के लिए नए चारे (घास) के लोभ में कुछ अज्ञात लोग जंगलों को आग के हवाले कर रहे हैं। विडंबना यह है कि ग्रामीण भी आग बुझाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। फिलहाल उपकरणों के साथ फायर वाचरों को मौके पर भेजा गया है और जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया जाएगा। - त्रिलोक सिंह राणा, वन दारोगा