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Pithoragarh News: चंडाक में बनेगा जिले का पहला रेस्क्यू सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 25 Jun 2026 11:19 PM IST
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पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती क्षेत्र चंडाक में जिले का पहला आधुनिक रेस्क्यू सेंटर बनने जा रहा है। वन विभाग की इस अनूठी पहल से जहां एक ओर समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ने वाले घायल वन्य जीवों को नया जीवन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सकेगी।
पिथौरागढ़ में अब तक वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर नहीं है। ऐसे में आबादी क्षेत्र में आकर हमला करने वाले हिंसक और घायल वन्यजीवों को पिंजरे में कैद कर अल्मोड़ा रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ता है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से अल्मोड़ा की दूरी करीब 115 किलोमीटर है जबकि जनपद के दूरदराज के हिस्सों से यह दूरी और बढ़ जाती है। इस कारण समय पर इलाज न मिलने कई बार घायल वन्यजीवों की रेस्क्यू सेंटर पहुंचने से पहले की मौत हो जाती है। कई बार अल्मोड़ा सेंटर में जानवरों की अधिकता के कारण दूसरी दिक्कतें भी सामने आती हैं। जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा। यह संभव होगा चंडाक में रेस्क्यू सेंटर बनने से। इस सेंटर में घायल और रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था होगी।
रेस्क्यू सेंटर में ये सुविधाएं होंगी
गंभीर रूप से घायल तेंदुआ, भालू और अन्य वन्य जीवों का तत्काल और बेहतर इलाज करने की सुविधा होगी। क्वारंटीन वार्ड में बीमार वन्यजीवों को अलग रखा जाएगा। वहीं पशु चिकित्सक और प्रशिक्षित स्टाफ़ की तैनाती रहेगी। वन्यजीवों को रखने के लिए मानकों के अनुसार पिंजरे-बाड़े बनेंगे। कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा भी होगी। संवाद
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सीमित हैं रेस्क्यू सेंटर, बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
प्रदेश भर में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटरों की संख्या सीमित है। इसमें अल्मोड़ा के अलावा रानीबाग, चिड़ियापुर और कॉर्बेट पार्क स्थित सेंटर शामिल हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं पिथौरागढ़ ही नहीं अन्य जनपदों में भी बढ़ी हैं। घायल होने की स्थिति में तेंदुआ या अन्य हिंसक वन्यजीव प्राकृतिक तौर पर शिकार न कर पाने पर भी कई बार इंसानों पर हमला करते हैं। रेस्क्यू सेंटर बनने से इन घटनाओं में काफी हद तक कमी आएगी। ऐसा इसलिए कि घायल वन्यजीव का इलाज होने पर वह फिर से अपने कुदरती आशियाने में लौटेगा।
..........
करीब 5.61 हेक्टेयर क्षेत्र में 24 करोड़ की लागत के वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव सेंट्रल ज़ू एजेंसी अपने मानकों पर परखने के बाद स्वीकृत करेगी। इसके बाद डीपीआर बनेगी। इसके बाद प्रदेश सरकार इसके लिए धनराशि जारी करेगी। उम्मीद है इस प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति मिलेगी। -आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ में अब तक वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर नहीं है। ऐसे में आबादी क्षेत्र में आकर हमला करने वाले हिंसक और घायल वन्यजीवों को पिंजरे में कैद कर अल्मोड़ा रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ता है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से अल्मोड़ा की दूरी करीब 115 किलोमीटर है जबकि जनपद के दूरदराज के हिस्सों से यह दूरी और बढ़ जाती है। इस कारण समय पर इलाज न मिलने कई बार घायल वन्यजीवों की रेस्क्यू सेंटर पहुंचने से पहले की मौत हो जाती है। कई बार अल्मोड़ा सेंटर में जानवरों की अधिकता के कारण दूसरी दिक्कतें भी सामने आती हैं। जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा। यह संभव होगा चंडाक में रेस्क्यू सेंटर बनने से। इस सेंटर में घायल और रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था होगी।
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रेस्क्यू सेंटर में ये सुविधाएं होंगी
गंभीर रूप से घायल तेंदुआ, भालू और अन्य वन्य जीवों का तत्काल और बेहतर इलाज करने की सुविधा होगी। क्वारंटीन वार्ड में बीमार वन्यजीवों को अलग रखा जाएगा। वहीं पशु चिकित्सक और प्रशिक्षित स्टाफ़ की तैनाती रहेगी। वन्यजीवों को रखने के लिए मानकों के अनुसार पिंजरे-बाड़े बनेंगे। कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा भी होगी। संवाद
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सीमित हैं रेस्क्यू सेंटर, बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
प्रदेश भर में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटरों की संख्या सीमित है। इसमें अल्मोड़ा के अलावा रानीबाग, चिड़ियापुर और कॉर्बेट पार्क स्थित सेंटर शामिल हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं पिथौरागढ़ ही नहीं अन्य जनपदों में भी बढ़ी हैं। घायल होने की स्थिति में तेंदुआ या अन्य हिंसक वन्यजीव प्राकृतिक तौर पर शिकार न कर पाने पर भी कई बार इंसानों पर हमला करते हैं। रेस्क्यू सेंटर बनने से इन घटनाओं में काफी हद तक कमी आएगी। ऐसा इसलिए कि घायल वन्यजीव का इलाज होने पर वह फिर से अपने कुदरती आशियाने में लौटेगा।
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करीब 5.61 हेक्टेयर क्षेत्र में 24 करोड़ की लागत के वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव सेंट्रल ज़ू एजेंसी अपने मानकों पर परखने के बाद स्वीकृत करेगी। इसके बाद डीपीआर बनेगी। इसके बाद प्रदेश सरकार इसके लिए धनराशि जारी करेगी। उम्मीद है इस प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति मिलेगी। -आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़