{"_id":"6a4155f826e6791f460d28ba","slug":"johar-valley-now-a-paradise-within-the-reach-of-tourists-pithoragarh-news-c-230-1-pth1019-143570-2026-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: जोहार घाटी... अब पर्यटकों की पहुंच में जन्नत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: जोहार घाटी... अब पर्यटकों की पहुंच में जन्नत
Sun, 28 Jun 2026 10:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 28 Jun 2026 10:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जैव विविधता और ऐतिहासिक विरासत को समेटे हिमनगरी मुनस्यारी की जोहार घाटी किसी जन्नत से कम नहीं है। सदियों तक तिब्बत व्यापार का मुख्य केंद्र रही यह ऐतिहासिक घाटी आज आधुनिक सड़क मार्ग से जुड़ चुकी है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब यह देश-विदेश के पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और पर्वतारोहियों के लिए पहले से कहीं अधिक सुलभ और पसंदीदा गंतव्य बन गई है।
जोहार घाटी के मध्य स्थित मिलम हिमानी (मिलम ग्लेशियर) कुमाऊं हिमालय के सबसे महत्वपूर्ण हिमनदों में से एक है। नंदा देवी पर्वत के उत्तर-पूर्व में स्थित यह विशाल हिमनद गोरी गंगा नदी का प्रमुख स्रोत माना जाता है। पूर्व में तिब्बत से व्यापार के लिए घाटी के मिलम, मारतोली, बुरफू और बिल्जू गांव प्राचीन व्यापारिक संस्कृति के साक्षी रहे हैं।
धापा से मिलम तक करीब 65 किलोमीटर सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र तक पहुंचना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो गया है। सड़क ने स्थानीय लोगों के जीवन को सरल बनाने के साथ ही पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति प्रदान की है।
विज्ञापन
करीब 20 वर्षों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग कर रहे अल्पाइन ट्रैक एंड एक्सपीडिशंस के निदेशक जगदीश भट्ट बताते हैं कि घाटी क्षेत्र में बनकटिया बेस कैंप, नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप और मिलम ग्लेशियर ट्रेक प्रमुख हैं। लास्पा गांव से बनकटिया बेस कैंप तक लगभग छह किलोमीटर लंबा ट्रेक हिमालय प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
वहीं घनघर गांव से नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप तक लगभग सात किलोमीटर का ट्रेक नंदा देवी पूर्वी शिखर के अद्भुत दृश्यों के लिए जाना जाता है। मिलम गांव से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिलम ग्लेशियर तक जाने वाला मार्ग भी देश-विदेश के पर्यटकों को काफी प्रिय है।
जैव विविधता का अनमोल खजाना
अल्पाइन ट्रैक एंड एक्सपीडिशंस के निदेशक जगदीश भट्ट का कहना है कि जोहार घाटी केवल हिमालयी सौंदर्य ही नहीं बल्कि अद्वितीय जैव विविधता के कारण भी विशेष महत्व रखती है। निचले क्षेत्रों में चौड़ी पत्ती वाले घने वन पाए जाते हैं। ऊंचाई बढ़ने पर रंग-बिरंगे बुग्याल, हिमनदीय मोरेन और अल्पाइन वनस्पतियां दिखाई देती हैं। यह क्षेत्र दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है। यहां हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), ब्लू शीप, घुरड़, कस्तूरी मृग, मोनाल व चकोर जैसे दुर्लभ पक्षी और जीव पाए जाते हैं। यहां ब्रह्मकमल, फेनकमल, कीड़ाजड़ी व अनेक प्रकार की दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं।
विज्ञापन
जोहार घाटी के मध्य स्थित मिलम हिमानी (मिलम ग्लेशियर) कुमाऊं हिमालय के सबसे महत्वपूर्ण हिमनदों में से एक है। नंदा देवी पर्वत के उत्तर-पूर्व में स्थित यह विशाल हिमनद गोरी गंगा नदी का प्रमुख स्रोत माना जाता है। पूर्व में तिब्बत से व्यापार के लिए घाटी के मिलम, मारतोली, बुरफू और बिल्जू गांव प्राचीन व्यापारिक संस्कृति के साक्षी रहे हैं।
विज्ञापन
धापा से मिलम तक करीब 65 किलोमीटर सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र तक पहुंचना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो गया है। सड़क ने स्थानीय लोगों के जीवन को सरल बनाने के साथ ही पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति प्रदान की है।
विज्ञापन
करीब 20 वर्षों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग कर रहे अल्पाइन ट्रैक एंड एक्सपीडिशंस के निदेशक जगदीश भट्ट बताते हैं कि घाटी क्षेत्र में बनकटिया बेस कैंप, नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप और मिलम ग्लेशियर ट्रेक प्रमुख हैं। लास्पा गांव से बनकटिया बेस कैंप तक लगभग छह किलोमीटर लंबा ट्रेक हिमालय प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
वहीं घनघर गांव से नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप तक लगभग सात किलोमीटर का ट्रेक नंदा देवी पूर्वी शिखर के अद्भुत दृश्यों के लिए जाना जाता है। मिलम गांव से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिलम ग्लेशियर तक जाने वाला मार्ग भी देश-विदेश के पर्यटकों को काफी प्रिय है।
जैव विविधता का अनमोल खजाना
अल्पाइन ट्रैक एंड एक्सपीडिशंस के निदेशक जगदीश भट्ट का कहना है कि जोहार घाटी केवल हिमालयी सौंदर्य ही नहीं बल्कि अद्वितीय जैव विविधता के कारण भी विशेष महत्व रखती है। निचले क्षेत्रों में चौड़ी पत्ती वाले घने वन पाए जाते हैं। ऊंचाई बढ़ने पर रंग-बिरंगे बुग्याल, हिमनदीय मोरेन और अल्पाइन वनस्पतियां दिखाई देती हैं। यह क्षेत्र दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है। यहां हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), ब्लू शीप, घुरड़, कस्तूरी मृग, मोनाल व चकोर जैसे दुर्लभ पक्षी और जीव पाए जाते हैं। यहां ब्रह्मकमल, फेनकमल, कीड़ाजड़ी व अनेक प्रकार की दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं।