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Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में सातूं-आठूं पर्व के लिए सजने लगे मुखौटे
Thu, 13 Aug 2026 12:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:20 AM IST
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पिथौरागढ़ के सतगढ़ गांव में सातूं-आठूं पर्व के लिए मुखौटे सजाते युवा। संवाद
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में शिव-पार्वती को समर्पित सातूं-आठूं पर्व की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसके लिए मुखौटे सजने लगे हैं। यह पर्व मुखौटा संस्कृति का भी वाहक है जो पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
सीमांत जिले में नगर से लेकर कस्बों, गांवों तक सातूं-आठूं पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार 19 को सातूं और 20 अगस्त को आठूं पर्व मनाया जाएगा इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। नगर के साथ ही कनालीछीना, सतगढ़, सिरोली, पनखोली, डुंगरी, बस्तड़ी, अस्कोट सहित अन्य क्षेत्रों में युवा इसकी तैयारी में जुट गए हैं। यह पर्व गौरा-महेश्वर यानि शिव-पार्वती को समर्पित है। सातूं पर्व पर विशेष घास सौं से गौरा जबकि दूसरे दिन आठूं पर्व को महेश्वर की प्रतिमा स्थापित कर इनकी पूजा-अर्चना होगी। इस पर्व की विशेष पहचान मुखौटा संस्कृति भी है। पर्व पर मुखौटों के जरिए बैलों की जोड़ी, हिरन चीतल, महाकाली आदि का प्रदर्शन किया जाता है। सतगढ़, कनालीछीना सहित अन्य क्षेत्रों में पर्व के लिए मुखौटे सजने लगे हैं। युवा इन मुखौटों पर रंग चढ़ाकर इन्हें संवारने के साथ इस प्राचीन संस्कृति को जीवंत करने में जुटे हैं।
झोड़ा-चांचरी का होने लगा गायन
पिथौरागढ़। जिले के सतगढ़, कनालीछीना, सिरोली सहित अन्य हिस्सों में झोड़ा-चांचरी का गायन शुरू हो गया है। सातूं-आठूं पर्व पर ठुलखेल के माध्यम से भगवान शिव, मां गौरा, भगवान कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं की आराधना भी की जाती है। महिलाएं और पुरुष झोड़ा-चांचरी का गायन कर अपनी लोक कला और संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं। संवाद
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बिरुड़ से मां गौरा के पूजन की है परंपरा
पिथौरागढ़। सातूं-आठूं पर्व पर बिरुड़ से मां गौरा के पूजन की परंपरा है। बिरुड़ पांच या सात अनाजों का मेल होता है इसमें सबसे प्रमुख गुरुश हैं जो विशेष अनाज है। गुरुश के साथ मटर, गेहूं सहित पांच या सात अनाजों का मिश्रण भिगोया जाता है। सातूं पर्व पर इसे नौले-धारों के पवित्र जल से धोया जाता है। इसी बिरुड़ से मां गौरा का पूजन होता है। पूजन के बाद बिरुड़ को पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। संवाद
पंडित शिरीष उपाध्याय ने बताया कि इस बार 19 को सातूं और 20 अगस्त को आठूं पर्व मनाया जाएगा। 17 अगस्त को बिरुड़ भिगोए जाएंगे। यह पर्व जिले की आस्था और परंपरा का केंद्र है।
कथ सुनने के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
लोहाघाट (चंपावत)। नगर से लगी ग्राम सभा फोर्ती स्थित त्यौंदर बाबा मंदिर में आठ दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ जारी है। कथा सुनने के लिए दूर-दराज के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान पुरोहित सागर पुनेठा और आचार्य भुवन बगौली ने सुबह पूजा-अर्चना संपन्न कराई। दोपहर बाद कथा व्यास योगेश कृष्ण शास्त्री ने शिव-पार्वती विवाह संवाद, भगवान शिव के स्वरूप और उनकी महिमा का वर्णन सुनाया।इस दौरान हीरा बल्लभ पुनेठा, बाबा अमर गिरी, बाबा दीनानाथ, योगेश बगौली, चंद्रशेखर बगौली, शंकर बगौली, मोहन चंद्र बगौली, महेश चंद्र बगौली, शेखर उपाध्याय, सोनू चौबे, लक्ष्मी दत्त जोशी, सागर पुनेठा, रोहित पुनेठा मौजूद रहे।
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सीमांत जिले में नगर से लेकर कस्बों, गांवों तक सातूं-आठूं पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार 19 को सातूं और 20 अगस्त को आठूं पर्व मनाया जाएगा इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। नगर के साथ ही कनालीछीना, सतगढ़, सिरोली, पनखोली, डुंगरी, बस्तड़ी, अस्कोट सहित अन्य क्षेत्रों में युवा इसकी तैयारी में जुट गए हैं। यह पर्व गौरा-महेश्वर यानि शिव-पार्वती को समर्पित है। सातूं पर्व पर विशेष घास सौं से गौरा जबकि दूसरे दिन आठूं पर्व को महेश्वर की प्रतिमा स्थापित कर इनकी पूजा-अर्चना होगी। इस पर्व की विशेष पहचान मुखौटा संस्कृति भी है। पर्व पर मुखौटों के जरिए बैलों की जोड़ी, हिरन चीतल, महाकाली आदि का प्रदर्शन किया जाता है। सतगढ़, कनालीछीना सहित अन्य क्षेत्रों में पर्व के लिए मुखौटे सजने लगे हैं। युवा इन मुखौटों पर रंग चढ़ाकर इन्हें संवारने के साथ इस प्राचीन संस्कृति को जीवंत करने में जुटे हैं।
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झोड़ा-चांचरी का होने लगा गायन
पिथौरागढ़। जिले के सतगढ़, कनालीछीना, सिरोली सहित अन्य हिस्सों में झोड़ा-चांचरी का गायन शुरू हो गया है। सातूं-आठूं पर्व पर ठुलखेल के माध्यम से भगवान शिव, मां गौरा, भगवान कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं की आराधना भी की जाती है। महिलाएं और पुरुष झोड़ा-चांचरी का गायन कर अपनी लोक कला और संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं। संवाद
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बिरुड़ से मां गौरा के पूजन की है परंपरा
पिथौरागढ़। सातूं-आठूं पर्व पर बिरुड़ से मां गौरा के पूजन की परंपरा है। बिरुड़ पांच या सात अनाजों का मेल होता है इसमें सबसे प्रमुख गुरुश हैं जो विशेष अनाज है। गुरुश के साथ मटर, गेहूं सहित पांच या सात अनाजों का मिश्रण भिगोया जाता है। सातूं पर्व पर इसे नौले-धारों के पवित्र जल से धोया जाता है। इसी बिरुड़ से मां गौरा का पूजन होता है। पूजन के बाद बिरुड़ को पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। संवाद
पंडित शिरीष उपाध्याय ने बताया कि इस बार 19 को सातूं और 20 अगस्त को आठूं पर्व मनाया जाएगा। 17 अगस्त को बिरुड़ भिगोए जाएंगे। यह पर्व जिले की आस्था और परंपरा का केंद्र है।
कथ सुनने के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
लोहाघाट (चंपावत)। नगर से लगी ग्राम सभा फोर्ती स्थित त्यौंदर बाबा मंदिर में आठ दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ जारी है। कथा सुनने के लिए दूर-दराज के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान पुरोहित सागर पुनेठा और आचार्य भुवन बगौली ने सुबह पूजा-अर्चना संपन्न कराई। दोपहर बाद कथा व्यास योगेश कृष्ण शास्त्री ने शिव-पार्वती विवाह संवाद, भगवान शिव के स्वरूप और उनकी महिमा का वर्णन सुनाया।इस दौरान हीरा बल्लभ पुनेठा, बाबा अमर गिरी, बाबा दीनानाथ, योगेश बगौली, चंद्रशेखर बगौली, शंकर बगौली, मोहन चंद्र बगौली, महेश चंद्र बगौली, शेखर उपाध्याय, सोनू चौबे, लक्ष्मी दत्त जोशी, सागर पुनेठा, रोहित पुनेठा मौजूद रहे।