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Pithoragarh: हिमालयी बुग्यालों में जून में भी नहीं पिघली बर्फ, कीड़ाजड़ी खोजने वालों की बढ़ी मुश्किलें

संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Fri, 05 Jun 2026 01:09 PM IST
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सार

पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जून माह में बुग्यालों और ग्लेशियरों में लगातार बर्फबारी व कम तापमान के कारण इस बार कीड़ाजड़ी बर्फ के नीचे दबी हुई है। ऐसे हालात में कीड़ाजड़ी की तलाश करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

Snowfall and low temperatures in June have increased the difficulties of herb hunters
मुनस्यारी के हिमालयी क्षेत्र पंचाचूली की तलहटी में कीड़ाजड़ी पातन को गए लोग और वहां बिछी बर्फ की सफेद चादर। - फोटो : स्रोत:ग्रामीण
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विस्तार

जून का महीना शुरू हो चुका है लेकिन उच्च हिमालयी बुग्यालों और ग्लेशियरों में अब भी बर्फ की मोटी चादर जमी हुई है। बेमौसम बर्फबारी और लगातार कम तापमान के कारण बेशकीमती कीड़ाजड़ी बर्फ के नीचे दबी हुई है। मौसम के इस बदले मिजाज ने न केवल कीड़ाजड़ी पातन पर ब्रेक लगा दिया है बल्कि इससे जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में इस बार हिमालयी क्षेत्रों में अधिक समय तक बर्फबारी हो रही है। कई स्थानों पर जमीन पर तीन से पांच इंच तक बर्फ जमी हुई है। वहां तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक बना हुआ है। ऐसे हालात में बुग्यालों और ग्लेशियरों में रुककर कीड़ाजड़ी की तलाश करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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मौसम में आए इस बदलाव को पर्यावरण असंतुलन का संकेत माना जा रहा है। जिले में हर वर्ष करीब 70 से 180 किलोग्राम कीड़ाजड़ी का पातन होता है। इस बार मौसम की बेरुखी के कारण उत्पादन और पातन दोनों प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। 

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कीड़ाजड़ी खोजने जाते हैं आठ हजार से अधिक लोग

पिथौरागढ़ जिले के रालम, राजरंभा, नागनीधुरा, छिपलाकेदार, धरतीधार, पंचाचूली की तलहटी स्थित बलाती ग्लेशियर, रूढ़खान समेत कई बुग्याल और ग्लेशियर कीड़ाजड़ी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। इन क्षेत्रों में हर साल आठ हजार से अधिक लोग कीड़ाजड़ी की तलाश में पहुंचते हैं। मुनस्यारी, मल्ला जोहार और धारचूला क्षेत्र के करीब 2000 परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी कीड़ाजड़ी ही है।

लगातार हो रही बर्फबारी के बीच कीड़ाजड़ी खोजना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बुग्यालों और ग्लेशियरों से वापस लौटना पड़ा है। इस बार मौसम की बेरुखी के चलते नुकसान झेलना होगा। - आनंद गोस्वामी, वल्थी

लगातार हो रही बर्फबारी और माइनस 10 डिग्री तापमान के बीच कीड़ाजड़ी खोलने के लिए रुकना असंभव हो रहा है। बर्फ की चादर के बीच कीड़ाजड़ी खोजना चुनौती है। ऐसे में वापस लौटना की मुनासिफ समझा। - मनोज, बसंतकोट

बर्फबारी देर तक होने से लोगों के लिए कीड़ाजड़ी खोलने के लिए हिमालयी क्षेत्रों में रुकना चुनौतीपूर्ण होगा। कीड़ाजड़ी पातन के लिए बर्फ पिघलने का इंतजार करना होगा। बर्फ के नीचे कीड़ाजड़ी खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसे पर्यावरण असंतुलन के रूप में भी देखा जा सकता है।-डॉ. नवीन चंद्र जोशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी परिषद, अल्मोड़ा

 

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