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Pithoragarh News: तेजम को जाकुला नदी के कटाव से खतरा

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 31 Jan 2026 11:13 PM IST
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Tejam is threatened by erosion by the Jakula River
जाकुला नदी किनारे बसा तेजम कस्बा जहां लगातार भू कटाव हो रहा है। संवाद
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नाचनी (पिथौरागढ़)। जाकुला नदी पर तटबंध न बनने से हमारे मकान खतरे में हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही हम अपने घरों में सो नहीं पाते हैं और हमें पूरी रात निगरानी करनी पड़ती है। कब तक हम इस तरह दहशत के साए में जीएंगे। हमारे घरों को तबाह होने से बचा लीजिए। यह कहना है तेजम के ग्रामीणों का। लंबे समय से भू-कटाव रोकने के लिए तटबंध न बनने से स्थानीय लोग निराश भी हैं और आक्रोशित भी।
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तेजम तहसील मुख्यालय के ठीक नीचे जाकुला नदी बहती है। इस नदी से भू-कटाव लंबे समय से जारी है और इसे रोकने के लिए आज तक तटबंध नहीं बनाए जा सके हैं। आबादी से सिर्फ 12 मीटर दूर बह रही नदी के कटाव से 24 से अधिक आवासीय मकानों के साथ ही अस्पताल, खाद्यान्न गोदाम, इंटर कॉलेज, प्राथमिक विद्यालय और तहसील खतरे में हैं। मानसूनकाल में यह दिक्कत अधिक बढ़ती है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ते ही उनकी चिंता इस कदर बढ़ती है कि वे अपने घरों के भीतर जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते। कई दिनों तक पूरी रात बगैर सोए उन्हें घरों की निगरानी करनी पड़ती है। हैरानी है कि आवासीय मकानों के साथ ही सरकारी संस्थानों को सुरक्षित बचाने के लिए अब तक सिस्टम ने गंभीरता नहीं दिखाई है।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि तटबंध का प्रस्ताव हर साल भेजा जा रहा है और इसे स्वीकृति नहीं मिल रही है। ऐसे में आपदा से बचाव के सभी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तटबंध नहीं बने तो उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
बोले प्रभावित
जाकुला नदी के कटाव से हमारे मकान खतरे में हैं। कभी भी ये मकान नदी में समा सकते हैं। यदि तटबंध नहीं बने तो हमें इसका नुकसान झेलना होगा। - खुशाल राम, तेजम
आपदा से जनता को सुरक्षित बचाने के दावे सिर्फ कागजों और बैठकों में होते हैं। यदि ये दावे धरातल पर उतरते तो जाकुला नदी में तटबंध बनते और हमें सुरक्षा मिलती। हमें रात-दिन अपने मकानों और परिवार की चिंता सता रही है। - गजराज सिंह राणा, पूर्व प्रधान, तेजम
जाकुला नदी से लगातार भू-कटाव हो रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से दिक्कत और बढ़ेगी। यदि तटबंध बनाकर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हुए तो यह लापरवाही कई लोगों पर भारी पड़ सकती है। - लता देवी, प्रधान, तेजम
जाकुला नदी पर तटबंध के निर्माण के लिए आकलन हर वर्ष शासन को भेजा जाता है। स्वीकृति मिलने के बाद ही तटबंधों का निर्माण संभव है। इस बार आपदा मद से भी तटबंध के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। - सुरेंद्र सिंह बिष्ट, अपर सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, नाचनी
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