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Pithoragarh: छह वर्षों बाद भारत-चीन व्यापार की शुरुआत, लिपुलेख दर्रे से व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट पहुंचा

Sat, 01 Aug 2026 02:45 PM IST
Heera शालू दताल
शालू दताल Published by: Heera Updated Sat, 01 Aug 2026 02:45 PM IST
सार

छह साल बाद लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार शुरू हो गया। भारत-चीन व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली के नेतृत्व में 20 सदस्यीय दल ने गुंजी में आव्रजन प्रक्रिया पूरी कर तकलाकोट पहुंचकर नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया।

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The first group of Indo-Chinese traders reached Taklakot
छह वर्षों बाद भारत-चीन व्यापार की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छह साल बाद शुरू हो रहे भारत-चीन व्यापार के लिए धारचूला के लिपुलेख दर्रे से व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट पहुंच गया है। उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि 31 जुलाई की सायं भारत-चीन व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारी एवं 4 हेल्परों सहित कुल 20 सदस्यों ने गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में निर्धारित आव्रजन प्रक्रिया पूर्ण की। दल के सदस्यों ने रात्रि विश्राम नाबीढांग में किया।

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शनिवार की सुबह नाभीढांग से आईटीबीपी की सुरक्षा में व्यापारी लिपुलेख दर्रा पहुंचे। लिपुलेख दर्रे पर 10:15 बजे चीन के अधिकारियों ने आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण की। इसके बाद चीन प्रशासन की सुरक्षा में व्यापारी वाहनों से तकलाकोट मंडी पहुंचे। उपजिलाधिकारी ने बताया कि चीन प्रशासन के निर्देशानुसार प्रथम चरण में केवल पूर्व से पंजीकृत एवं पहले व्यापार कर चुके व्यापारियों को ही प्रवेश की अनुमति प्रदान की गई है। इस कारण व्यापारी भारत से कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गए हैं। व्यापारी तकलाकोट में पूर्व से उपलब्ध अपनी व्यापारिक सामग्री एवं उससे संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए व्यापार का संचालन करेंगे। एसडीएम जोशी ने बताया कि अन्य व्यापारिक दलों के तकलाकोट प्रस्थान की तिथियों के निर्धारण के संबंध में चीन प्रशासन के साथ ई-मेल के माध्यम से नियमित समन्वय एवं पत्राचार किया जा रहा है। बताया कि जैसे ही अगले बैचों के लिए अनुमति एवं तिथियां प्राप्त होंगी, अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट मंडी भेजा जाएगा। दोनों देशाें के मध्य व्यापार शुरू होने से सीमांत के व्यापारियों में काफी उत्साह है।
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नाभीढांग से आगे नहीं है संचार व्यवस्था
व्यास घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्र नाभीढांग से आगे संचार की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते व्यापाारियों का अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पाता है। गुंजी में भी सिग्नल काफी कम मिलते हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पहले व्यापारी पैदल ही लिपुलेख दर्रा पार करते थे। अब वहां तक सड़क बनने से काफी सुविधा हो गई है।

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