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Pithoragarh News: आधे नगर में मटमैले पानी की आपूर्ति, 50 हजार लोग परेशान
Fri, 31 Jul 2026 11:13 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:13 PM IST
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फोटो-31 पीटीएच 19 पी-सुरेंद्र प्रसाद, पुराना बाजार।
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पिथौरागढ़। मानसूनी बारिश के बाद रामगंगा और सरयू नदी में मलबा आने से नगर की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो गई है। आंवलाघाट और घाट पंपिंग योजनाओं से मटमैले पानी की आपूर्ति होने से नगर के 50 हजार से अधिक लोग परेशान हैं। हालात यह हैं कि लोग पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
बीते कुछ दिनों से टकाना, नया बाजार, पुराना बाजार, ऐंचोली, तिलढुकरी समेत नगर के कई मोहल्लों में नलों से मटमैला पानी आ रहा है। पानी के साथ बाल्टियों में मलबा आने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि पानी उबालने के बाद भी उसे पीने में संकोच हो रहा है। ऐसे में कई परिवार प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोने या बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
कृष्णापुरी वार्ड निवासी आनंद बिष्ट ने बताया कि नलों से आने वाला पानी उबालने के बाद भी पीने योग्य नहीं लग रहा है। ऐसे में प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। विमला देवी ने बताया कि दो दिन से मटमैले और दुर्गंधयुक्त पानी की आपूर्ति हो रही है। खाना बनाने और पीने के लिए पानी की व्यवस्था दूसरे स्रोतों से करनी पड़ रही है। लोगों ने मानसून के दौरान शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताते हुए व्यवस्था में जल्द सुधार की मांग की है।
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सप्लाई टैंक में जमा हो रही गंदगी
आंवलाघाट पेयजल योजना के मुख्य टैंकों में भी मटमैला पानी पहुंचने से मलबा जमा हो रहा है। इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही टैंकों में गंदगी के कारण कीड़े पनपने का खतरा भी बना हुआ है। जल संस्थान की ओर से टैंकों की सफाई और क्लोरीनेशन कराया गया है।
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बोले लोग
लंबे समय से मटमैले पानी की आपूर्ति होने से परेशान हैं। पीने के लिए बोतल बंद पानी खरीदना मजबूरी बन गया है। व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
सुरेंद्र प्रसाद, पुराना बाजार
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मटमैले पानी का उपयोग न तो पीने के लिए हो रहा है और ना ही अन्य कामों के लिए। लंबे समय से यह दिक्कत बनी हुई है लेकिन सुधार नहीं हो रहा है।
ध्रुव धामी, टकाना
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बारिश शुरू होते ही मटमैले पानी की आपूर्ति शुरू हो गई थी जो अब तक नहीं रुकी है। इससे बीमारी का खतरा भी बना हुआ है। नलों में आने वाला पानी उपयोग के योग्य नहीं है।
नीलम, नया बाजार
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कोट-नदियों में मलबा आने से योजनाओं के फिल्टर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इस वजह से दिक्कत आ रही है। जल्द जल निगम के साथ मिलकर फिल्टर की सफाई की जाएगी।
सुव्रत सिंह, एई, जल संस्थान, पिथौरागढ़
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बीते कुछ दिनों से टकाना, नया बाजार, पुराना बाजार, ऐंचोली, तिलढुकरी समेत नगर के कई मोहल्लों में नलों से मटमैला पानी आ रहा है। पानी के साथ बाल्टियों में मलबा आने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि पानी उबालने के बाद भी उसे पीने में संकोच हो रहा है। ऐसे में कई परिवार प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोने या बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
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कृष्णापुरी वार्ड निवासी आनंद बिष्ट ने बताया कि नलों से आने वाला पानी उबालने के बाद भी पीने योग्य नहीं लग रहा है। ऐसे में प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। विमला देवी ने बताया कि दो दिन से मटमैले और दुर्गंधयुक्त पानी की आपूर्ति हो रही है। खाना बनाने और पीने के लिए पानी की व्यवस्था दूसरे स्रोतों से करनी पड़ रही है। लोगों ने मानसून के दौरान शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताते हुए व्यवस्था में जल्द सुधार की मांग की है।
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सप्लाई टैंक में जमा हो रही गंदगी
आंवलाघाट पेयजल योजना के मुख्य टैंकों में भी मटमैला पानी पहुंचने से मलबा जमा हो रहा है। इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही टैंकों में गंदगी के कारण कीड़े पनपने का खतरा भी बना हुआ है। जल संस्थान की ओर से टैंकों की सफाई और क्लोरीनेशन कराया गया है।
बोले लोग
लंबे समय से मटमैले पानी की आपूर्ति होने से परेशान हैं। पीने के लिए बोतल बंद पानी खरीदना मजबूरी बन गया है। व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
सुरेंद्र प्रसाद, पुराना बाजार
मटमैले पानी का उपयोग न तो पीने के लिए हो रहा है और ना ही अन्य कामों के लिए। लंबे समय से यह दिक्कत बनी हुई है लेकिन सुधार नहीं हो रहा है।
ध्रुव धामी, टकाना
बारिश शुरू होते ही मटमैले पानी की आपूर्ति शुरू हो गई थी जो अब तक नहीं रुकी है। इससे बीमारी का खतरा भी बना हुआ है। नलों में आने वाला पानी उपयोग के योग्य नहीं है।
नीलम, नया बाजार
कोट-नदियों में मलबा आने से योजनाओं के फिल्टर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इस वजह से दिक्कत आ रही है। जल्द जल निगम के साथ मिलकर फिल्टर की सफाई की जाएगी।
सुव्रत सिंह, एई, जल संस्थान, पिथौरागढ़

फोटो-31 पीटीएच 19 पी-सुरेंद्र प्रसाद, पुराना बाजार।

फोटो-31 पीटीएच 19 पी-सुरेंद्र प्रसाद, पुराना बाजार।