चीन से नहीं मिला संदेश: तकलाकोट जाने का इंतजार नहीं हो रहा खत्म, एक महीने से इंतजार कर रहे हैं 46 व्यापारी
चीन प्रशासन की ओर से लंबे समय से कोई जवाब या अनुमति न मिलने के कारण 46 व्यापारियों का तकलाकोट मंडी जाने का इंतजार अभी तक खत्म नहीं हुआ है। ये सभी व्यापारी अब भी चीन की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत-चीन व्यापार के लिए चीन प्रशासन की तरफ से लंबे समय बाद भी कोई संदेश न मिलने से 46 व्यापारियों का तकलाकोट मंडी जाने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। ये व्यापारी चीन की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
दरअसल, छह साल बाद शुरू हुए भारत-चीन व्यापार के लिए 62 व्यापारियों ने ट्रेड पास हासिल किए हैं। सभी को उम्मीद थी कि वे समय से तलकोट मंडी पहुंचकर व्यापार करेंगे। उनकी यह उम्मीद परवान नहीं चढ़ पा रही है। चीन ने सिर्फ 16 व्यापारियों को तलकोट पहुंचने की अनुमति दी है जिनका सामान पहले से मंडी में पड़ा है। ये व्यापारी कुछ दिन पूर्व तकलाकोट रवाना हुए हैं। चीन प्रशासन के पूर्व में जारी संदेश में अन्य व्यापारियों को बाद में अनुमति देने की बात कही गई थी। अब तक चीन प्रशासन से इस मामले में कोई संदेश नहीं मिला है इससे तलाकोट जाने का इंतजार कर रहे 46 व्यापारी निराश हैं। भारतीय प्रशासन ने चीन प्रशासन को दूसरे दल को भेजने के संबंध में मेल भेजा गया है लेकिन अब तक इसका जवाब नहीं मिला है। ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने कहा कि तलकोट यानि चीन प्रशासन को दूसरा दल भेजने के संबंध में मेल भेजा गया है। जवाब आने के बाद भी निर्णय लिया जाएगा।
गुंजी में डंप है सामान
छह साल बाद भारत-चीन व्यापार शुरू होने से व्यापारियों में खुशी थी। व्यापारियों ने पूर्व में ही गुड़, मिश्री, माचिस सहित अन्य सामान गुंजी पहुंचा दिया था। चीन प्रशासन के निर्णय के मुताबिक, न तो तकलाकोट गए व्यापारी सामान ले जा सके और ना ही अन्य व्यापारियों को वहां जाने की अनुमति मिली है। गुंजी में गोदामों में डंप सामान मानसूनकाल में बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गया है। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली ने कहा कि यदि व्यापारियों को तलकोट जाने की अनुमति नहीं मिली तो सामान बर्बाद हो जाएगा और उन्हें नुकसान झेलना होगा।