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Rishikesh News: कटने से बचाने के लिए पीपल के पेड़ से लिपट गए अधिवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:07 AM IST
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पीपल वृक्ष से चिपके एडवोकेट बहुगुणा: संवाद
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रानीपोखरी में हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रहे करीब 100 साल पुराने पीपल के पेड़ को कटने से बचाने के लिए एक अधिवक्ता पेड़ से चिपक गए। कुछ देर बाद वहीं पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर धरने पर बैठ गए। विरोध के बाद वन विभाग की टीम ने फिलहाल पेड़ काटना बंद कर दिया है। विभागीय अधिकारी भी दूसरे रेंज की बात कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
रानीपोखरी क्षेत्र के एडवोकेट और समाजसेवी लक्ष्मी प्रसाद बहुगुणा ने कहा कि स्व. शाह इंटर कॉलेज के सामने उनके घर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे करीब 100 साल पुराना पीपल का एक वृक्ष है, जिसके नीचे चबूतरा बना हुआ है। यह पेड़ लोगों की आस्था का केंद्र भी है। पर्यावरण की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। इस पेड़ से क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था जुड़ी है।
शुक्रवार को जब वह ऋषिकेश तहसील से घर पहुंचे तो देखा कि पीपल के वृक्ष को जड़ से काटने के लिए उसकी बड़ी शाखाओं को काटा जा रहा है। उन्होंने जब इसका विरोध किया तो मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश हैं कि यह पेड़ हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रहा है इसलिए इसे जड़ से काट दिया जाए।
विरोध करते हुए वह पेड़ से चिपक गए। उनकी मांग है कि पेड़ को काटने के बजाय इसको कहीं शिफ्ट किया जाए। उल्लेखनीय है कि भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग को फोरलेन बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें करीब सात हजार से अधिक दशकों पुराने हरे पेड़ काटे जाने प्रस्तावित हैं। जनहित याचिका के कारण फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन सिविल भूमि पर पेड़ कटान का काम शुरू किया जा चुका है।
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वृक्षों को शिफ्ट करने में काफी पीछे हैं विभाग
विदेशों में बड़े वृक्षों को प्रत्यारोपण करने के लिए क्रेन, हाईड्रोलिक ट्री ट्रांसप्लांटर या जेसीबी और दूसरी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है लेकिन हमारे यहां विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों को जड़ से काट दिया जाता है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज से एयरपोर्ट की तरफ आते हुए मुख्य मार्ग के बाईं तरफ जंगल में कुछ वर्ष पूर्व कहीं से लाकर दर्जनों बड़े पेड़ों को प्रत्यारोपित किया गया था, जिनमें से एक पेड़ भी हरा नहीं हुआ। अब ये जंगल किसी हाॅर्रर फिल्म के दृश्य जैसा दिखता है।
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- यह मामला थानो वन रेंज से जुड़ा हुआ है। थानो वन रेंज की टीम ही पीपल के वृक्ष को काट रही है। इसमें थानो के अधिकारी ही जवाब दे पाएंगे। - धीरज रावत, रेंजर बड़कोट वन रेंज
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- पेड़ काटने का मामला थानो वन रेंज का नहीं बल्कि बड़कोट वन रेंज से जुड़ा हुआ है। छपान के कागजों में भी बड़कोट के अधिकारियों के ही हस्ताक्षर हैं। इसलिए बड़कोट रेंज के अधिकारी ही इसमें जवाब देंगे। - एनएल डोभाल, रेंजर थानो रेंज
रानीपोखरी क्षेत्र के एडवोकेट और समाजसेवी लक्ष्मी प्रसाद बहुगुणा ने कहा कि स्व. शाह इंटर कॉलेज के सामने उनके घर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे करीब 100 साल पुराना पीपल का एक वृक्ष है, जिसके नीचे चबूतरा बना हुआ है। यह पेड़ लोगों की आस्था का केंद्र भी है। पर्यावरण की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। इस पेड़ से क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था जुड़ी है।
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शुक्रवार को जब वह ऋषिकेश तहसील से घर पहुंचे तो देखा कि पीपल के वृक्ष को जड़ से काटने के लिए उसकी बड़ी शाखाओं को काटा जा रहा है। उन्होंने जब इसका विरोध किया तो मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश हैं कि यह पेड़ हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रहा है इसलिए इसे जड़ से काट दिया जाए।
विरोध करते हुए वह पेड़ से चिपक गए। उनकी मांग है कि पेड़ को काटने के बजाय इसको कहीं शिफ्ट किया जाए। उल्लेखनीय है कि भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग को फोरलेन बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें करीब सात हजार से अधिक दशकों पुराने हरे पेड़ काटे जाने प्रस्तावित हैं। जनहित याचिका के कारण फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन सिविल भूमि पर पेड़ कटान का काम शुरू किया जा चुका है।
वृक्षों को शिफ्ट करने में काफी पीछे हैं विभाग
विदेशों में बड़े वृक्षों को प्रत्यारोपण करने के लिए क्रेन, हाईड्रोलिक ट्री ट्रांसप्लांटर या जेसीबी और दूसरी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है लेकिन हमारे यहां विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों को जड़ से काट दिया जाता है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज से एयरपोर्ट की तरफ आते हुए मुख्य मार्ग के बाईं तरफ जंगल में कुछ वर्ष पूर्व कहीं से लाकर दर्जनों बड़े पेड़ों को प्रत्यारोपित किया गया था, जिनमें से एक पेड़ भी हरा नहीं हुआ। अब ये जंगल किसी हाॅर्रर फिल्म के दृश्य जैसा दिखता है।
- यह मामला थानो वन रेंज से जुड़ा हुआ है। थानो वन रेंज की टीम ही पीपल के वृक्ष को काट रही है। इसमें थानो के अधिकारी ही जवाब दे पाएंगे। - धीरज रावत, रेंजर बड़कोट वन रेंज
- पेड़ काटने का मामला थानो वन रेंज का नहीं बल्कि बड़कोट वन रेंज से जुड़ा हुआ है। छपान के कागजों में भी बड़कोट के अधिकारियों के ही हस्ताक्षर हैं। इसलिए बड़कोट रेंज के अधिकारी ही इसमें जवाब देंगे। - एनएल डोभाल, रेंजर थानो रेंज