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शिक्षा संस्थानों को कौशल विकास व नवाचार का केंद्र बनाना होगा : योगी
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 07 Feb 2026 01:35 AM IST
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जनता इंटर कालेज यमकेश्वर में आयोजित कार्यक्रम को दौरान संबोधित करते यूपी के सीएम योगी आदित्य न
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा संस्थानों को कौशल विकास और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हम बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार करें। भौतिक विकास के साथ-साथ संस्कारयुक्त शिक्षा से राष्ट्र निर्माण होगा।
शुक्रवार को इंटर कॉलेज यमकेश्वर परिसर में नवनिर्मित दो मंजिला भवन के उद्घाटन के बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भौतिक विकास जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह केवल तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक संजोने का भी कार्य करें।
उन्होंने पौराणिक गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुकुल पद्धति व्यक्ति को सशक्त, संस्कारवान एवं पारंगत बनाने का प्रभावी माध्यम थी। प्राचीन काल में जिन संस्थानों को हम गुरुकुल कहते थे, वे केवल पढ़ाई के स्थान नहीं थे। वे जीवन निर्माण के केंद्र थे। गुरुकुल शिल्प के भी केंद्र थे, कृषि के भी, आयुर्वेद के भी और जीवन में पारंगत बनाने के भी। वहां से निकलकर छात्र कहीं भी जीवन-संग्राम में असहाय नहीं होता था।
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उत्तराखंड सिर्फ सुंदर नहीं है, यह वीरों की भूमि है
सीएम योगी ने कहा कि जब भी हमारे मन में यह भाव आता है कि हमें अपने देश के लिए कुछ करना है, तो हमें देवभूमि उत्तराखंड की ओर देखना चाहिए। यह भूमि केवल सुंदर नहीं है, यह वीरों की भूमि है। यहां का नौजवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है। जीवन के जिस भी क्षेत्र में गया है, उसने अपनी प्रभावी उपस्थिति से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी है। हिमालय से निकला हुआ जल पूरे उत्तर भारत की धरती को सींचता है, देश का पेट भरता है और भारत को विश्व के लिए खाद्यान्न आपूर्ति का केंद्र बनाता है।
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गांव हमारी संस्कृति की जड़
सीएम योगी ने कहा कि हमें बच्चों को गांव में रखकर, गांव से जोड़कर शिक्षा देने की प्रवृत्ति को मजबूत करना होगा। क्योंकि गांव हमारी संस्कृति की जड़ हैं। जड़ जितनी गहरी और मजबूत होती है, पेड़ उतना ही फलता-फूलता है। जड़ कमजोर होगी तो पेड़ हल्की आंधी में भी गिर जाएगा। हमें अपनी संस्कृति, अपने समाज और अपने गांवों को किसी भी विचारधारा की आंधी या तूफान की चपेट में नहीं आने देना है। गांवों को शिक्षा, नवाचार और स्वरोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। हमें फिर से ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करना होगा। जहां आत्मनिर्भरता हो, सहभागिता हो और सम्मानपूर्ण जीवन हो। योगी ने कहा कि मुझे अपना बचपन याद है। इस क्षेत्र में जब हमने जन्म लिया, तब हमारी सरकार पर निर्भरता मात्र 14 प्रतिशत थी। हम अपने अधिकांश काम स्वयं करते थे। गांव की सड़क भी गांव के लोग मिलकर बना लेते थे।
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शिक्षा को हमें संस्कारों से जोड़ना होगा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे शिक्षा केंद्र केवल ज्ञान के नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता के आधार स्तंभ भी बनने चाहिए। शिक्षा को हमें संस्कारों से जोड़ना है। आज कुछ लोग अधकचरे ज्ञान के साथ आकर प्रश्न उठाते हैं कि विद्यालयों में सरस्वती वंदना क्यों, राष्ट्रगान क्यों, राष्ट्रगीत क्यों। योगी ने कहा कि ये सब हमारे संस्कारों के प्रतीक हैं। मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा के भाव हैं। मां सरस्वती किसी जाति, भाषा या वर्ग की नहीं होतीं, जो मेहनत करेगा, सकारात्मक सोचेगा, सही दिशा में चलेगा, उसकी कृपा उस पर अवश्य बरसेगी। कहा कि नकारात्मकता जीवन को पतन की ओर ले जाती है, सकारात्मकता जीवन को प्रगति की ओर। अगर प्रगति चाहिए तो सकारात्मक सोच अपनानी होगी। परिश्रम, संस्कार और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
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उत्तराखंड में हैं अपार संभावनाएं
सीएम योगी ने कहा कि उत्तराखंड के पास अपार अवसर हैं। यहां के किसान, यहां के युवा, यहां की प्रतिभा तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है, शुद्ध जल, पर्यटन, बागवानी, कृषि और सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। विद्यालय को इन क्षेत्रों से भी बच्चों को जोड़ना चाहिए, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार दोनों की दिशा में आगे बढ़ सकें।
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शुक्रवार को इंटर कॉलेज यमकेश्वर परिसर में नवनिर्मित दो मंजिला भवन के उद्घाटन के बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भौतिक विकास जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह केवल तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक संजोने का भी कार्य करें।
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उन्होंने पौराणिक गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुकुल पद्धति व्यक्ति को सशक्त, संस्कारवान एवं पारंगत बनाने का प्रभावी माध्यम थी। प्राचीन काल में जिन संस्थानों को हम गुरुकुल कहते थे, वे केवल पढ़ाई के स्थान नहीं थे। वे जीवन निर्माण के केंद्र थे। गुरुकुल शिल्प के भी केंद्र थे, कृषि के भी, आयुर्वेद के भी और जीवन में पारंगत बनाने के भी। वहां से निकलकर छात्र कहीं भी जीवन-संग्राम में असहाय नहीं होता था।
उत्तराखंड सिर्फ सुंदर नहीं है, यह वीरों की भूमि है
सीएम योगी ने कहा कि जब भी हमारे मन में यह भाव आता है कि हमें अपने देश के लिए कुछ करना है, तो हमें देवभूमि उत्तराखंड की ओर देखना चाहिए। यह भूमि केवल सुंदर नहीं है, यह वीरों की भूमि है। यहां का नौजवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है। जीवन के जिस भी क्षेत्र में गया है, उसने अपनी प्रभावी उपस्थिति से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी है। हिमालय से निकला हुआ जल पूरे उत्तर भारत की धरती को सींचता है, देश का पेट भरता है और भारत को विश्व के लिए खाद्यान्न आपूर्ति का केंद्र बनाता है।
गांव हमारी संस्कृति की जड़
सीएम योगी ने कहा कि हमें बच्चों को गांव में रखकर, गांव से जोड़कर शिक्षा देने की प्रवृत्ति को मजबूत करना होगा। क्योंकि गांव हमारी संस्कृति की जड़ हैं। जड़ जितनी गहरी और मजबूत होती है, पेड़ उतना ही फलता-फूलता है। जड़ कमजोर होगी तो पेड़ हल्की आंधी में भी गिर जाएगा। हमें अपनी संस्कृति, अपने समाज और अपने गांवों को किसी भी विचारधारा की आंधी या तूफान की चपेट में नहीं आने देना है। गांवों को शिक्षा, नवाचार और स्वरोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। हमें फिर से ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करना होगा। जहां आत्मनिर्भरता हो, सहभागिता हो और सम्मानपूर्ण जीवन हो। योगी ने कहा कि मुझे अपना बचपन याद है। इस क्षेत्र में जब हमने जन्म लिया, तब हमारी सरकार पर निर्भरता मात्र 14 प्रतिशत थी। हम अपने अधिकांश काम स्वयं करते थे। गांव की सड़क भी गांव के लोग मिलकर बना लेते थे।
शिक्षा को हमें संस्कारों से जोड़ना होगा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे शिक्षा केंद्र केवल ज्ञान के नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता के आधार स्तंभ भी बनने चाहिए। शिक्षा को हमें संस्कारों से जोड़ना है। आज कुछ लोग अधकचरे ज्ञान के साथ आकर प्रश्न उठाते हैं कि विद्यालयों में सरस्वती वंदना क्यों, राष्ट्रगान क्यों, राष्ट्रगीत क्यों। योगी ने कहा कि ये सब हमारे संस्कारों के प्रतीक हैं। मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा के भाव हैं। मां सरस्वती किसी जाति, भाषा या वर्ग की नहीं होतीं, जो मेहनत करेगा, सकारात्मक सोचेगा, सही दिशा में चलेगा, उसकी कृपा उस पर अवश्य बरसेगी। कहा कि नकारात्मकता जीवन को पतन की ओर ले जाती है, सकारात्मकता जीवन को प्रगति की ओर। अगर प्रगति चाहिए तो सकारात्मक सोच अपनानी होगी। परिश्रम, संस्कार और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
उत्तराखंड में हैं अपार संभावनाएं
सीएम योगी ने कहा कि उत्तराखंड के पास अपार अवसर हैं। यहां के किसान, यहां के युवा, यहां की प्रतिभा तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है, शुद्ध जल, पर्यटन, बागवानी, कृषि और सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। विद्यालय को इन क्षेत्रों से भी बच्चों को जोड़ना चाहिए, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार दोनों की दिशा में आगे बढ़ सकें।