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युवाओं में बढ़ रही फैटी लिवर की समस्या : डाॅ. अजीत
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 22 Feb 2026 02:52 AM IST
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की ओर से श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में फैटी लिवर स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 70 छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों का लिवर स्कैन एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
डीन विज्ञान संकाय प्रो. एसपी सती, डीन वाणिज्य संकाय प्रो. वीपी श्रीवास्तव, डीन छात्र कल्याण प्रो. हेमलता मिश्रा ने संयुक्त रूप से शिविर का उद्घाटन किया। एम्स के प्रो. डॉ. अजीत भदौरिया ने कहा कि लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो हमारे शरीर को हानिकारक पदार्थों से मुक्त करता है। मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है और ऊर्जा के संचयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आज की बदलती जीवनशैली, जंक फूड, मीठे पेय, तनाव, देररात तक जागने की आदत और व्यायाम की कमी के कारण युवाओं में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रहा है। यह बीमारी शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए इसे साइलेंट डिसीज कहा जाता है। समय पर इसकी पहचान न की जाए तो यह गंभीर लिवर रोगों का कारण बन सकती है। प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट की वॉक, नियमित व्यायाम, हरी सब्जियों एवं संतुलित भोजन का सेवन, जंक फूड एवं मीठे पेय से दूरी, धूम्रपान और शराब का त्याग, तनाव का नियंत्रण और साल में एक बार लिवर की जांच, ये आदतें युवाओं को जीवनभर स्वस्थ रख सकती हैं। परिसर निदेशक प्रो. एमएस. रावत ने परिसर में शिविर आयोजित किये जाने पर एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर प्रो. अनीता तोमर, प्रो. संगीता मिश्रा, प्रो. वीएन गुप्ता, प्रो. वीके गुप्ता, प्रो. सीएस नेगी, प्रो. मनोज यादव, प्रो. हेमंत परमार, डॉ. गौरव वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
डीन विज्ञान संकाय प्रो. एसपी सती, डीन वाणिज्य संकाय प्रो. वीपी श्रीवास्तव, डीन छात्र कल्याण प्रो. हेमलता मिश्रा ने संयुक्त रूप से शिविर का उद्घाटन किया। एम्स के प्रो. डॉ. अजीत भदौरिया ने कहा कि लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो हमारे शरीर को हानिकारक पदार्थों से मुक्त करता है। मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है और ऊर्जा के संचयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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आज की बदलती जीवनशैली, जंक फूड, मीठे पेय, तनाव, देररात तक जागने की आदत और व्यायाम की कमी के कारण युवाओं में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रहा है। यह बीमारी शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए इसे साइलेंट डिसीज कहा जाता है। समय पर इसकी पहचान न की जाए तो यह गंभीर लिवर रोगों का कारण बन सकती है। प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट की वॉक, नियमित व्यायाम, हरी सब्जियों एवं संतुलित भोजन का सेवन, जंक फूड एवं मीठे पेय से दूरी, धूम्रपान और शराब का त्याग, तनाव का नियंत्रण और साल में एक बार लिवर की जांच, ये आदतें युवाओं को जीवनभर स्वस्थ रख सकती हैं। परिसर निदेशक प्रो. एमएस. रावत ने परिसर में शिविर आयोजित किये जाने पर एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर प्रो. अनीता तोमर, प्रो. संगीता मिश्रा, प्रो. वीएन गुप्ता, प्रो. वीके गुप्ता, प्रो. सीएस नेगी, प्रो. मनोज यादव, प्रो. हेमंत परमार, डॉ. गौरव वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।