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Rishikesh News: नीलकंठ में गूंज रहा बम-बम भोले का जयकारा
Mon, 03 Aug 2026 02:04 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:04 AM IST
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नीलकंठ से जलाभिषेक कर शिव का स्टेच्यू को कंधे पर पानीपत जाते कांवड़ यात्री- संवाद
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तीसरे पंचक के दिन भी नीलकंठ मंदिर में जलाभिषेक करने वाले कांवड़ यात्रियों का कारवां कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कांवड़ यात्री पैदल ही बाघखाला से नीलकंठ मंदिर पहुंच रहे हैं। यात्रियों की लाइनें कम होने का नाम नहीं ले रही है। नीलकंठ में बम-बम भोले का जयकारा गूंज रहा है।
शास्त्रों के अनुसार पंचक में कांवड़ उठाना वर्जित माना जाता है लेकिन पंच में बिना कांवड़ वाले यात्री नीलकंठ पहुंच रहे हैं। यात्री पैदल चलकर भोले के दर पर पहुंचकर जलाभिषेक कर रहे हैं। कांवड़ यात्रियों के बाघखाला से नीलकंठ जाने से पूरे रास्ते पर चहल-पहल है। वहीं स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भंडारे लगाकर कांवड़ यात्रियों को भोजन कराया जा रहा है। स्थानीय दुकानदारों की ओर से भोजन, जलेबी आदि की व्यवस्था की गई है। कांवड़ यात्रा की वजह से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
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शिव की प्रतिमा कंधे पर रखकर नीलकंठ पहुंचे आकाश और मोनू
पानीपत के आकाश और मोनू अपने कंधे पर शिव का स्टैच्यू रखकर पानीपत से पैदल नीलकंठ पहुंचे। पानीपत से नीलकंठ पहुंचने में छह दिन लगे। जबकि वापसी में छह दिन लगेंगे। मीडिया से बातचीत में मोनू और आकाश ने बताया कि वह पानीपत की एक फैक्टरी में एक साथ काम करते हैं। इस साल कांवड़ यात्रा में नीलकंठ जाने का प्लान बना। उसके बाद उन्होंने शिव का स्टैच्यू खरीदा। पूजा अर्चना के बाद स्टैच्यू को कंधे पर रखकर नीलकंठ पहुंचे। जलाभिषेक के बाद वापस घर जाने लगे। उन्होंने बताया अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए उन्होंने इस बार यात्रा की है।
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शास्त्रों के अनुसार पंचक में कांवड़ उठाना वर्जित माना जाता है लेकिन पंच में बिना कांवड़ वाले यात्री नीलकंठ पहुंच रहे हैं। यात्री पैदल चलकर भोले के दर पर पहुंचकर जलाभिषेक कर रहे हैं। कांवड़ यात्रियों के बाघखाला से नीलकंठ जाने से पूरे रास्ते पर चहल-पहल है। वहीं स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भंडारे लगाकर कांवड़ यात्रियों को भोजन कराया जा रहा है। स्थानीय दुकानदारों की ओर से भोजन, जलेबी आदि की व्यवस्था की गई है। कांवड़ यात्रा की वजह से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
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शिव की प्रतिमा कंधे पर रखकर नीलकंठ पहुंचे आकाश और मोनू
पानीपत के आकाश और मोनू अपने कंधे पर शिव का स्टैच्यू रखकर पानीपत से पैदल नीलकंठ पहुंचे। पानीपत से नीलकंठ पहुंचने में छह दिन लगे। जबकि वापसी में छह दिन लगेंगे। मीडिया से बातचीत में मोनू और आकाश ने बताया कि वह पानीपत की एक फैक्टरी में एक साथ काम करते हैं। इस साल कांवड़ यात्रा में नीलकंठ जाने का प्लान बना। उसके बाद उन्होंने शिव का स्टैच्यू खरीदा। पूजा अर्चना के बाद स्टैच्यू को कंधे पर रखकर नीलकंठ पहुंचे। जलाभिषेक के बाद वापस घर जाने लगे। उन्होंने बताया अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए उन्होंने इस बार यात्रा की है।
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