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Roorkee News: नेत्रदान से दो नेत्रहीनों के जीवन में आएगी रोशनी
Mon, 20 Jul 2026 07:15 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Mon, 20 Jul 2026 07:15 PM IST
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स्व. मनेन्द्र सिंह सजवान के परिजनों ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी, निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान ने की सराहना
रुड़की। आवास विकास निवासी स्वर्गीय मनेंद्र सिंह सजवान (62 वर्ष) के निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान कर मानवता और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके पुत्र निखिल सजवान और जितेंद्र सिंह सजवान ने अपने पिता की आंखें दान करने की इच्छा जताते हुए निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान को सूचना दी। सूचना मिलने पर संस्थान की टीम, जिसमें डॉ. मनिका और मक्रेंदु शामिल थे, उनके आवास पर पहुंची और सफलतापूर्वक कॉर्निया प्राप्त किए। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान प्रशासन ने सजवान परिवार की सेवा भावना और सामाजिक जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान महादान है, जो किसी व्यक्ति को नया जीवन देने के समान है। संस्थान ने लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सके। संस्थान के अनुसार मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। इस दौरान मृतक की आंखें बंद रखनी चाहिए, उन पर गीली रुई रखनी चाहिए व कमरे में पंखा बंद और संभव हो तो एसी चालू रखना चाहिए। सिर के नीचे तकिया रखने से भी प्रक्रिया में सहायता मिलती है।
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रुड़की। आवास विकास निवासी स्वर्गीय मनेंद्र सिंह सजवान (62 वर्ष) के निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान कर मानवता और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके पुत्र निखिल सजवान और जितेंद्र सिंह सजवान ने अपने पिता की आंखें दान करने की इच्छा जताते हुए निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान को सूचना दी। सूचना मिलने पर संस्थान की टीम, जिसमें डॉ. मनिका और मक्रेंदु शामिल थे, उनके आवास पर पहुंची और सफलतापूर्वक कॉर्निया प्राप्त किए। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान प्रशासन ने सजवान परिवार की सेवा भावना और सामाजिक जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान महादान है, जो किसी व्यक्ति को नया जीवन देने के समान है। संस्थान ने लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सके। संस्थान के अनुसार मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। इस दौरान मृतक की आंखें बंद रखनी चाहिए, उन पर गीली रुई रखनी चाहिए व कमरे में पंखा बंद और संभव हो तो एसी चालू रखना चाहिए। सिर के नीचे तकिया रखने से भी प्रक्रिया में सहायता मिलती है।