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Roorkee News: लौकी, तोरी और खीरे की फसलों पर माइट का हमला
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गर्मी की शुरुआत होते ही बेल वाली फसलों जैसे लौकी, तोरी, खीरा और कद्दू आदि पर कीटों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इस समय किसान सबसे ज्यादा माइट (मकड़ी) की समस्या से जूझ रहे हैं। यह सूक्ष्म कीट न केवल पत्तियों का रस चूसता है बल्कि देखते ही देखते पूरी फसल को बरबाद कर देता है। माइट इतने छोटे होते हैं कि इन्हें आंखों से देख पाना मुश्किल होता है।
नारसन कस्बा स्थित राजा महेंद्र प्रताप प्रेम डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सर्वेंद्र सिंह ने बताया कि तापमान बढ़ने पर माइट का प्रसार तेजी से होता है। किसान अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें और खरपतवारों को हटाते रहे क्योंकि ये कीट अक्सर खरपतवारों पर ही पनपते हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित पत्तियां ऊपर से पीली या सफेद धब्बेदार दिखाई देने लगती हैं।
अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां नीचे की ओर मुड़कर सूखने लगती है। पत्तियों की निचली सतह पर बारीक सफेद जाले दिखाई देते हैं। पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फलों का आकार टेढ़ा-मेढ़ा या छोटा रह जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते नियंत्रण ही फसल को बचाने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने बताया कि पांच मिली नीम के तेल को प्रति लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों की निचली सतह पर छिड़काव करें। पानी की तेज बौछार से भी मकड़ियों के जाले और कीटों को साफ किया जा सकता है। यदि प्रकोप ज्यादा हो तो ओमाइट दो मिली प्रति लीटर या फेनपायरोक्सीमेट एक मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। ध्यान रहे कि छिड़काव हमेशा पत्तियों के निचले हिस्से पर अच्छी तरह होना चाहिए क्योंकि माइट वहीं छिपे होते हैं।
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नारसन कस्बा स्थित राजा महेंद्र प्रताप प्रेम डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सर्वेंद्र सिंह ने बताया कि तापमान बढ़ने पर माइट का प्रसार तेजी से होता है। किसान अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें और खरपतवारों को हटाते रहे क्योंकि ये कीट अक्सर खरपतवारों पर ही पनपते हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित पत्तियां ऊपर से पीली या सफेद धब्बेदार दिखाई देने लगती हैं।
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अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां नीचे की ओर मुड़कर सूखने लगती है। पत्तियों की निचली सतह पर बारीक सफेद जाले दिखाई देते हैं। पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फलों का आकार टेढ़ा-मेढ़ा या छोटा रह जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते नियंत्रण ही फसल को बचाने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने बताया कि पांच मिली नीम के तेल को प्रति लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों की निचली सतह पर छिड़काव करें। पानी की तेज बौछार से भी मकड़ियों के जाले और कीटों को साफ किया जा सकता है। यदि प्रकोप ज्यादा हो तो ओमाइट दो मिली प्रति लीटर या फेनपायरोक्सीमेट एक मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। ध्यान रहे कि छिड़काव हमेशा पत्तियों के निचले हिस्से पर अच्छी तरह होना चाहिए क्योंकि माइट वहीं छिपे होते हैं।
