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Roorkee News: सूचना न देने पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को नोटिस
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सूचना का अधिकार के प्रति बरती गई लापरवाही और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करना ग्राम पंचायत विकास अधिकारी बिझौली को भारी पड़ गया है। उत्तराखंड सूचना आयोग ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए लोक सूचना अधिकारी शांतनु चौहान को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उन पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाए और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाए।
मंगलौर निवासी शकील अहमद ने 20 अगस्त 2025 को लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन कर नारसन विकासखंड के बिझौली गांव से संबंधित 17 बिंदुओं पर महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी थीं। निर्धारित अवधि तक सूचना नहीं मिलने पर अपीलकर्ता ने प्रथम अपील की।
प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 16 दिसंबर 2025 को अपील का निस्तारण करते हुए एक सप्ताह के भीतर सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद सूचना न मिलने पर शकील अहमद ने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। उत्तराखंड सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी न तो सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति जागरूक हैं और न ही अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों के प्रति गंभीर हैं।
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वीपीओ शांतनु चौहान को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि सूचना न देने और आदेशों की अवहेलना पर उन पर 25,000 रुपये का जुर्माना क्यों न लगाया जाए। सेवा नियमावली के तहत उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग ने कहा कि सात दिन के भीतर अपीलकर्ता को मांगी गई सूचना बिंदुवार प्रमाणित कर उपलब्ध कराई जाए और इसकी पुष्टि आयोग को दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
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मंगलौर निवासी शकील अहमद ने 20 अगस्त 2025 को लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन कर नारसन विकासखंड के बिझौली गांव से संबंधित 17 बिंदुओं पर महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी थीं। निर्धारित अवधि तक सूचना नहीं मिलने पर अपीलकर्ता ने प्रथम अपील की।
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प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 16 दिसंबर 2025 को अपील का निस्तारण करते हुए एक सप्ताह के भीतर सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद सूचना न मिलने पर शकील अहमद ने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। उत्तराखंड सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी न तो सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति जागरूक हैं और न ही अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों के प्रति गंभीर हैं।
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वीपीओ शांतनु चौहान को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि सूचना न देने और आदेशों की अवहेलना पर उन पर 25,000 रुपये का जुर्माना क्यों न लगाया जाए। सेवा नियमावली के तहत उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग ने कहा कि सात दिन के भीतर अपीलकर्ता को मांगी गई सूचना बिंदुवार प्रमाणित कर उपलब्ध कराई जाए और इसकी पुष्टि आयोग को दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।