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Roorkee News: श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई संत शिरोमणि रविदास जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Sun, 01 Feb 2026 05:38 PM IST
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विभिन्न गांवों में निकली भव्य शोभायात्राएं, आकर्षक झांकियों ने मोहा मन, भंडारों में उमड़े श्रद्धालु
पिरान कलियर। क्षेत्र में संत शिरोमणि रविदास की जयंती रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न गांवों में आकर्षक झांकियां सजाकर शोभायात्राएं निकाली गई जो गांवों की मुख्य गलियों से होकर गुजरी। शोभायात्राओं को देखने के लिए गलियों और मकानों की छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
कलियर, इमलीखेड़ा, मेहवड़ खुर्द, बाजुहेड़ी, रहमतपुर, मेहवड़ कलां, माजरी, राघड़वाला बेल्डा, हकीमपुर तुर्रा, दरियापुर, रांघड़वाला सहित अन्य गांवों में जयंती के अवसर पर आयोजन किए गए। शोभायात्राएं रविदास मंदिरों से प्रारंभ होकर गांवों की प्रमुख गलियों से निकाली गई। रंग-बिरंगी और सुंदर झांकियों ने सभी का मन मोह लिया।
मेहवड़ कलां समेत अन्य रविदास मंदिरों में भंडारों का आयोजन भी किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने संत रविदास के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज से जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव को मिटाने का संदेश दिया। 15 वीं सदी के महान संत और समाज सुधारक संत रविदास ने मानवता, समानता और भाईचारे की शिक्षा दी। वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवनकाल में छुआछूत जैसी कुरीतियों का विरोध किया और समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ निरंतर आवाज उठाई। उनका जन्म ऐसे समय में हुआ जब समाज अंधविश्वास, कुप्रथाओं, अन्याय और अत्याचार से ग्रस्त था। उन्होंने अपने विचारों और कर्मों से समाज को नई दिशा दी। वक्ताओं ने सभी से संत रविदास के पदचिह्नों पर चलकर समानता और सद्भाव का संदेश अपनाने का आह्वान किया।
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पिरान कलियर। क्षेत्र में संत शिरोमणि रविदास की जयंती रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न गांवों में आकर्षक झांकियां सजाकर शोभायात्राएं निकाली गई जो गांवों की मुख्य गलियों से होकर गुजरी। शोभायात्राओं को देखने के लिए गलियों और मकानों की छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
कलियर, इमलीखेड़ा, मेहवड़ खुर्द, बाजुहेड़ी, रहमतपुर, मेहवड़ कलां, माजरी, राघड़वाला बेल्डा, हकीमपुर तुर्रा, दरियापुर, रांघड़वाला सहित अन्य गांवों में जयंती के अवसर पर आयोजन किए गए। शोभायात्राएं रविदास मंदिरों से प्रारंभ होकर गांवों की प्रमुख गलियों से निकाली गई। रंग-बिरंगी और सुंदर झांकियों ने सभी का मन मोह लिया।
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मेहवड़ कलां समेत अन्य रविदास मंदिरों में भंडारों का आयोजन भी किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने संत रविदास के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज से जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव को मिटाने का संदेश दिया। 15 वीं सदी के महान संत और समाज सुधारक संत रविदास ने मानवता, समानता और भाईचारे की शिक्षा दी। वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवनकाल में छुआछूत जैसी कुरीतियों का विरोध किया और समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ निरंतर आवाज उठाई। उनका जन्म ऐसे समय में हुआ जब समाज अंधविश्वास, कुप्रथाओं, अन्याय और अत्याचार से ग्रस्त था। उन्होंने अपने विचारों और कर्मों से समाज को नई दिशा दी। वक्ताओं ने सभी से संत रविदास के पदचिह्नों पर चलकर समानता और सद्भाव का संदेश अपनाने का आह्वान किया।
