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Rudraprayag News: नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की हुई पूजा

संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग Updated Thu, 19 Mar 2026 06:28 PM IST
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Goddess Shailputri was worshipped on the first day of Navratri.
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विभिन्न देवी मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु, सुख-समृद्धि की कामना की
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग/अगस्त्यमुनि/कर्णप्रयाग। हिंदू नव संवत्सर और चैत्र नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और भक्तों ने मां शैलपुत्री की पूजा की। मंदिरों में पूजा के लिए सुबह से ही लाइन लगी रही। लोगों ने घरों में हरियाली भी बोई।
वहीं अगस्त्यमुनि कीर्तन मंडली समिति की ओर से भजन-कीर्तन किए गए। कीर्तन मंडली ने गढ़वाली भजनों की भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कीर्तन मंडली अध्यक्ष शाखंभरी खत्री, वैष्णवी सेमवाल, सावित्री देवी आदि मौजूद रहे। वहीं जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कालीमठ मंदिर में पूजा-अर्चना की और जनपद की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने केदारनाथ यात्रा के सफल संचालन की प्रार्थना की। इसके बाद रुच्छ महादेव मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं।
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कर्णप्रयाग में देवी मंदिरों में माता की पूजा के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। उमा देवी मंदिर, नंदा देवी मंदिर नौटी, श्री राज राजेश्वरी चंडिका मंदिर सिमली, कालिंका मंदिर गौचर, नंदा देवी मंदिर कोटी, दशमद्वार महा काली मंदिर कोट कंडारा, दक्षिण काली मंदिर चांदपुरगढ़ी आदि देवी मंदिरों में माता शैल पुत्री की पूजा की गई। श्री राजराजेश्वरी चंडिका मंदिर सिमली में सुंदरगांव की महिलाओं ने भजन-कीर्तन किए।



बैना गांव में मां अनसूया की डोली की हुई विशेेष पूजाएं
गोपेश्वर/नंदानगर/पोखरी। चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर बृहस्पतिवार को देवी मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ा रहा। भक्तों ने पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की। गोपेश्वर के चंडिका मंदिर के साथ ही अनसूया माता मंदिर, घुड़साल इंद्रामति मंदिर, नंदप्रयाग चंडिका माता मंदिर, जिलासू व सिमली चंडिका माता मंदिर, राज राजेश्वरी मंदिर, ब्राह्मण थाला गांव के ज्वालामुखी मंदिर में सुबह से ही भक्तगण पहुंचे। खल्ला गांव की मां अनसूया देवी की दिवारा यात्रा ग्राम पंचायत देवर खडोरा के बैना गांव में पहुंची। यहां डोली की विशेष पूजाएं हुईं। पोखरी के नागनाथ गढ़ी मंदिर में भी नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो गया है। नवरात्रों में ही मंदिर में माता के नए फरसे की स्थापना होगी। संवाद


ढोल-दमाऊं की थाप पर किया देवनृत्य
कर्णप्रयाग। जिलासू की चंडिका देवी की दिवारा यात्रा ने बृहस्पतिवार को उमट्टा गांव में भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान मां चंडिका के ऐरवालों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर देवनृत्य कर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। महिलाओं और ग्रामीणों ने भजन-कीर्तन, मांगल, जागर आदि पौराणिक गीतों से देवी की स्तुति की। आराध्य माता चंडिका को रोट, अरसे, मालपुवे, वस्त्र-आभूषण आदि भेंट किए। दोपहर को देवी ने चंडी माई के मंदिर की परिक्रमा कर अपनी बहन को वस्त्र-आभूषण अर्पित कर उनसे विदा ली। भक्तों काे आशीर्वाद देते हुए रात्रि प्रवास के लिए यात्रा कालेश्वर पहुंची। यहां ग्रामीणों ने वाद्य यंत्रों और पुष्प वर्षा के साथ यात्रा का स्वागत किया। इस मौके पर विमल डिमरी, समिति के सचिव ईश्वर सिंह राणा, बद्री प्रसाद डिमरी, भुवन डिमरी, विनय डिमरी, अनिल, नरेश चंद्र आदि मौजूद रहे। संवाद

कालीमठ मंदिर में श्रीयंत्र की होती है पूजा
चैत्र नवरात्र के सजा माता का दरबार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुप्तकाशी। कालीमठ मंदिर में यूं तो सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां अधिक भीड़ उमड़ती है। सरस्वती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर स्थित है मगर इस सिद्धपीठ में माता की प्रतिमा के स्थान पर श्रीयंत्र की पूजा की जाती है। मान्यता है कि गर्भगृह में स्थित यह श्री यंत्र विशेष शक्ति का प्रतीक है जिसके दर्शन वर्ष में केवल नवरात्र के दौरान ही कराए जाते हैं।
मान्यताओं के अनुसार कालीमठ को 108 शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। यहां मां काली के साथ महालक्ष्मी, मां सरस्वती और गौरी-शंकर के मंदिर भी स्थित हैं। इनके दर्शन कर श्रद्धालु पुण्य अर्जित करते हैं। मंदिर के वरिष्ठ पुजारी आचार्य सुरेशानंद गौड़ बताते हैं कि पौराणिक मान्यता है कि मां काली ने अत्याचारी असुर शुंभ-निशुंभ का वध कर इसी स्थान पर अंतर्ध्यान लिया था। यही कारण है कि कालीमठ को मां काली का महासिद्धपीठ माना जाता है और यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।
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