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Tehri News: सिंचाई के अभाव में खरसोन, टटोर और खैराड़ के खेत होने लगे बंजर
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Wed, 10 Jun 2026 04:02 PM IST
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नहरों की मरम्मत न होने से काश्तकारों में आक्रोश, लगाई मरम्मत की गुहार
नैनबाग (टिहरी)। जौनपुर ब्लॉक के खरसोन, टटोर, खैराड़ गांव की सिंचाई नहरों की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों की सिंचित खेती बंजर होने लगे हैं जिससे काश्तकारों में आक्रोश बना है। उन्होंने शासन-प्रशासन से शीघ्र क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत की मांग उठाई है।
नैनबाग क्षेत्र के खरसोन, टटोर, खैराड़ा और सुमन क्यारी गांव सिंचाई नहरों का मरम्मत कार्य न होने से ग्रामीणों के सामने खेती की सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है। खैराड़ के ग्राम प्रधान प्रदीप कवि, टटोर के पूर्व ग्राम प्रधान गंभीर सिंह रावत, खरसोन के पूर्व प्रधान अनिल बिजल्वाण ने बताया कि विगत वर्षों में आपदा के कारण उनके गांवों की सिंचाई नहरे जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई थी।
नहरों पर मरम्मत कार्य न होने से उनकी स्थिति और खराब हो गई है। ग्रामीणों की मांग पर लघु सिंचाई विभाग ने गत वर्ष जहां जहां नहरे क्षतिग्रस्त थी, वहां प्लास्टिक के पाइप बिछाएं। गत वर्ष आई आपदा से नहरों की स्थिति और खराब होने लगी। नहरों में पानी चलने के लिए जो पाइप बिछाए गए थे उनमें मिट्टी भरने से पानी की सप्लाई बंद पड़ गई। ग्रामीणों ने उन्हें खोलने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए।
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बताया टटोर और सुमन क्यारी के लिए बल्डखाड स्रोत से खैराड के लिए बद्रीगाड़ गदेरे से और खरसोन के लिए क्यारी खड स्रोत से पानी आता था। तीनों गांवों की नहरे करीब आधा किलोमीटर लंबी है। मरम्मत के अभाव में नहरों की स्थिति बदहाल हो चुकी है। सिंचाई की समस्या होने से काश्तकार खेतों में धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही नगदी फसलों का उत्पादन भी बड़े स्तर पर प्रभावित हो रहा है। सिंचाई का पानी न मिलने से काश्तकारों की आजीविका पर इसका बड़ा असर पड़ा है जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने शासन-प्रशासन से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों की शीघ्र मरम्मत की मांग की है।
नैनबाग क्षेत्र की क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत और नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। पहले चरण में जो बजट मिला उसे अन्य ब्लॉकों की नहरों की मरम्मत के लिए भेजा दिया गया है। जौनपुर क्षेत्र के लिए दूसरे चरण में धनराशि मिलनी है जिसके बाद ही नहरों की मरम्मत और नव निर्माण कार्य हो पाएगा।
बृजेश कुमार गुप्ता, ईई लघु सिंचाई टिहरी।
नैनबाग (टिहरी)। जौनपुर ब्लॉक के खरसोन, टटोर, खैराड़ गांव की सिंचाई नहरों की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों की सिंचित खेती बंजर होने लगे हैं जिससे काश्तकारों में आक्रोश बना है। उन्होंने शासन-प्रशासन से शीघ्र क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत की मांग उठाई है।
नैनबाग क्षेत्र के खरसोन, टटोर, खैराड़ा और सुमन क्यारी गांव सिंचाई नहरों का मरम्मत कार्य न होने से ग्रामीणों के सामने खेती की सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है। खैराड़ के ग्राम प्रधान प्रदीप कवि, टटोर के पूर्व ग्राम प्रधान गंभीर सिंह रावत, खरसोन के पूर्व प्रधान अनिल बिजल्वाण ने बताया कि विगत वर्षों में आपदा के कारण उनके गांवों की सिंचाई नहरे जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई थी।
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नहरों पर मरम्मत कार्य न होने से उनकी स्थिति और खराब हो गई है। ग्रामीणों की मांग पर लघु सिंचाई विभाग ने गत वर्ष जहां जहां नहरे क्षतिग्रस्त थी, वहां प्लास्टिक के पाइप बिछाएं। गत वर्ष आई आपदा से नहरों की स्थिति और खराब होने लगी। नहरों में पानी चलने के लिए जो पाइप बिछाए गए थे उनमें मिट्टी भरने से पानी की सप्लाई बंद पड़ गई। ग्रामीणों ने उन्हें खोलने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए।
बताया टटोर और सुमन क्यारी के लिए बल्डखाड स्रोत से खैराड के लिए बद्रीगाड़ गदेरे से और खरसोन के लिए क्यारी खड स्रोत से पानी आता था। तीनों गांवों की नहरे करीब आधा किलोमीटर लंबी है। मरम्मत के अभाव में नहरों की स्थिति बदहाल हो चुकी है। सिंचाई की समस्या होने से काश्तकार खेतों में धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही नगदी फसलों का उत्पादन भी बड़े स्तर पर प्रभावित हो रहा है। सिंचाई का पानी न मिलने से काश्तकारों की आजीविका पर इसका बड़ा असर पड़ा है जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने शासन-प्रशासन से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों की शीघ्र मरम्मत की मांग की है।
नैनबाग क्षेत्र की क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत और नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। पहले चरण में जो बजट मिला उसे अन्य ब्लॉकों की नहरों की मरम्मत के लिए भेजा दिया गया है। जौनपुर क्षेत्र के लिए दूसरे चरण में धनराशि मिलनी है जिसके बाद ही नहरों की मरम्मत और नव निर्माण कार्य हो पाएगा।
बृजेश कुमार गुप्ता, ईई लघु सिंचाई टिहरी।