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Tehri News: बजट के अभाव में दम तोड़ रहा लामकांडे का सरकारी स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 30 May 2026 05:15 PM IST
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विद्यालय के क्षतिग्रस्त दरवाजे, खिड़की और चहारदीवारी छात्रों के लिए बने हैं खतरा
विद्यालय में बना रहता है चोरी का खतरा
नई टिहरी। जौनपुर ब्लॉक के सकलाना पट्टी के लामकांडे गांव के प्राथमिक विद्यालय भवन के दरवाजे, खिड़की और चहारदीवारी क्षतिग्रस्त होने से छात्र-छात्राओं के लिए खतरा बना है। साथ ही विद्यालय में चोरी का खतरा भी बना रहता है।
लामकांडे गांव के ग्राम प्रधान दिनेश सिंह रावत ने बताया गांव में वर्ष 2000 के आसपास गांव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण हुआ था। लंबा समय बीतने के बाद विद्यालय के कमरों और बरामदे का फर्श उखड़ने से जगह-जगह गड्ढे बने हैं। साथ ही खिड़की, दरवाजे भी टूट गए है। रसोई घर और शौचालय की स्थिति भी मरम्मत के अभाव में जर्जर बनी है।
विद्यालय की चहारदीवारी और खेल मैदान की स्थिति भी खराब होने के कारण छात्रों को खेलने में परेशानी होती है। वर्तमान में विद्यालय में गांव के 22 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है। खिड़की और दरवाजे खराब होने से विद्यालय में रखे समान के चोरी होने का डर भी बना रहता है। रसोई घर की स्थिति जर्जर स्थित होने से भोजन माता को खाना बनने में दिक्कत होती है।
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शौचालय की स्थिति भी खराब बनी है। ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई है लेकिन पैसा नहीं मिलने के कारण मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कार्की का कहना कि ग्राम प्रधान या अन्य किसी के माध्यम से विद्यालय के मरम्मत का प्रस्ताव उनके पास आया होगा तो उनके स्तर से शीघ्र ही प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों और शासन को भेज दिया जाता है। पैसा मिलने के बाद ही विद्यालय के मरम्मत कार्य हो पाए।
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विद्यालय में बना रहता है चोरी का खतरा
नई टिहरी। जौनपुर ब्लॉक के सकलाना पट्टी के लामकांडे गांव के प्राथमिक विद्यालय भवन के दरवाजे, खिड़की और चहारदीवारी क्षतिग्रस्त होने से छात्र-छात्राओं के लिए खतरा बना है। साथ ही विद्यालय में चोरी का खतरा भी बना रहता है।
लामकांडे गांव के ग्राम प्रधान दिनेश सिंह रावत ने बताया गांव में वर्ष 2000 के आसपास गांव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण हुआ था। लंबा समय बीतने के बाद विद्यालय के कमरों और बरामदे का फर्श उखड़ने से जगह-जगह गड्ढे बने हैं। साथ ही खिड़की, दरवाजे भी टूट गए है। रसोई घर और शौचालय की स्थिति भी मरम्मत के अभाव में जर्जर बनी है।
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विद्यालय की चहारदीवारी और खेल मैदान की स्थिति भी खराब होने के कारण छात्रों को खेलने में परेशानी होती है। वर्तमान में विद्यालय में गांव के 22 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है। खिड़की और दरवाजे खराब होने से विद्यालय में रखे समान के चोरी होने का डर भी बना रहता है। रसोई घर की स्थिति जर्जर स्थित होने से भोजन माता को खाना बनने में दिक्कत होती है।
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शौचालय की स्थिति भी खराब बनी है। ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई है लेकिन पैसा नहीं मिलने के कारण मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कार्की का कहना कि ग्राम प्रधान या अन्य किसी के माध्यम से विद्यालय के मरम्मत का प्रस्ताव उनके पास आया होगा तो उनके स्तर से शीघ्र ही प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों और शासन को भेज दिया जाता है। पैसा मिलने के बाद ही विद्यालय के मरम्मत कार्य हो पाए।